हास्य व्यंग्य

क्या रखा है प्रणाम करने में 

बहुत समय हुआ जब से  वे लोगों को प्रणाम करना भूल गए हैं।  इसके पहले वे बहुत व्यहवारिक थे। हमेशा सबको प्रणाम -पाती करते रहते थे। एक दिन उन्होनें  एक निकट जानने वाले को प्रणाम कर दिया। उनका प्रणाम करना जैसे सामने वाले को गुस्सा दिला गया। आदमी आग-बबूला हो गया।  बोला तुमने मेरा रास्ता काट दिया।  मानो प्रणाम करने वाला बिल्ली  हो और प्रणामी का रास्ता काट गया हो।  प्रणामी , प्रणाम करने वाले से बोला, कि देखो मैं बाहर जा रहा था।  इस तरह टोककर तुमने मेरा जतरा  खराब कर दिया है। फिर कभी  इस तरह से ना टोकना। नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। 

एक बार एक सज्जन पड़ोसी को पीछे से टोके। प्रणामी , प्रणाम से बोले कि देखो भाई ये भी कोई बात हुई कि मैं काम पे  जा रहा हूंँ। जा तो रहा हूंँ। और पहले- पहल तुमने टोका है। अगर मेरा काम खराब गया।  या मेरा काम ना हुआ तो मुझसे बुरा कोई ना होगा।    उस दिन से प्रणामी जी ने कान ऐंठ लिया है। और किसी को अब प्रणाम नहीं करते। अब वो ये मानने लगे हैं,  कि क्या  रखा है प्रणाम करने में। 

वो प्रणाम करने के पीछे सोचते हैं कि आज के जमाने में जब लोग बिना मतलब के कोई बात नहीं पूछते। तो वे  बेवजह दूसरे को  प्रणाम क्यों करते हैं। कौन आदमी किसी बात को कैसे सोचता है।  किस बात को कैसे लेता है। किस आदमी का मूड कब और कैसा है।  उसको बेकार में क्यों टोकना। उसको टोककर उसका और अपना मूड क्यों खराब करना। अब अपने जैसे लोगों से ही लोगों को संबंध रखना चाहिए। ऐसे -वैसे , जैसे तैसे लोगों से मुँह क्यों लगना। अपनी इज्जत अपने हाथ। 

 प्रणाम कहने से लोग गले पड़ जाते हैं। आपको अगर लोगो को गले में टाँगना है, तो प्रणाम करते रहिए। और अपना समय गलाते रहिए । हर प्रणाम में दस-पाँच मिनट गलना आम बात है। प्रणाम करने का समय आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में किसके पास है।  लेकिन हैं कुछ लोग जो महिलाओं की आई. डी. में घुस-घुसकर हाय -हैलो करने से बाज नहीं आते। जो बायोडाटा पढ़ने के बाद भी इनबाॅक्स में इंटरव्यू लेने से बाज नहीं आते। 

प्रणाम पाती से लोगों को पिछलग्गू होने का डर लगा रहता है। जैसे ही आपने प्रणाम किया लोग कन्नी काटने लगते हैं, कि जरूर कुछ ना कुछ मतलब है तभी ये प्रणाम कर रहा है। कलियुग में लोग प्रणाम अपने मतलब के लिए करते हैं। कोई काम निकालना हो तो लोग सुबह -शाम आपको प्रणाम करने लगते हैं। इस तरह अगर कोई आपको सुबह -शाम प्रणाम कर रहा हो जो समझ लीजिए की आपसे उसको कुछ काम है। चुनावी सीजन हो तो मानकर चलिए कि उसको आपका वोट चाहिए। बिना मतलब तो लोग अपने बाप को भी प्रणाम नहीं करते। हमलोग तो आम लोग हैं। 

ज्यादा प्रणाम करने के नुकासान ज्यादा और फायदे कम हैं। आपके ज्यादा सामाजिक होने पर लोगों का जहाँ -तहाँ से आपको प्रणाम मिलने  लगता है। फिर ले प्रणाम दे प्रणाम का दौर शुरू हो जाता है। लोग एक-दूसरे पर प्रणाम फेंक-फेंककर मारने लगते हैं। प्रणाम ले दही , दे दही हो जाता है।  तो प्रणाम ना करने के आपको फायदे बताता हूँ। प्रणाम नहीं करेंगें तो पैसा और समय दोनों बचेगा । अगर आप प्रणाम करते हैं, तो लोग  ऊँगली पकड़कर, पहुँचा, फिर हाथ पकड़ने  लगते हैं। लिहाजा प्रणाम करने से बचिए। 

— महेश कुमार केशरी

महेश कुमार केशरी

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