व्यंग्य – झोले में झमेला
झोला उठाना पुराने समय में खराब होता होगा। लेकिन आज के समय में झोला उठाने वाला सबसे ज्यादा चुस्त- दुरूस्त
Read Moreझोला उठाना पुराने समय में खराब होता होगा। लेकिन आज के समय में झोला उठाने वाला सबसे ज्यादा चुस्त- दुरूस्त
Read Moreआज सालों बाद खुला सँदूकतो उसमें मिली कुछ चिठ्ठियाँ ,चिठ्ठियों के दिन पुरे हो चुके थेपीले पड़ गए पुराने पृष्ठजगह-
Read Moreदेखो तुम मेरे भीतर सेमरती चली गईऔर मुझे पता भी नहीं चलाये बात मुझे अभी बहुत दु:ख पहुँचा रही है
Read Moreउनको होगी जरूरत मीलों चलने की। खाना पचाने के लिए टहलने की। जो पच्चीस ग्राम खाकर छतों परटहलते है़ं। हम
Read Moreमैं मजदूर हूँ, काम पर से घरनहीं लौटतामेरा घर बहुत दूर हैगाँव जब -जब जाता हूँ तोलोग पूछते हैं भाई
Read Moreलोगों को बहुत जल्दीबाजी है। सब लोग लबर- लबर करने में लगे हैं। न्यूज और व्यूज पाने की। अपडेशन की
Read Moreएक बाबा जी के विचार सुनने को मिले। सचमुच उनको सुनकर दिल गदगद हो गया। वो आदमी और आदमी में
Read Moreदेहरी लाँघती स्त्रियाँलाँघती तो हैं देहरीलेकिन देहरी लाँघते हुए भीछूट जाती हैं , घर के भीतर बहुतभीतर कोनों अंतरों में
Read Moreसेठानी ने सेठजी से पूछा -” खाना खा लिया। “सेठजी गल्ले की चाभी दराज में रखते हुए बोले – ”
Read Moreबहुत समय हुआ जब से वे लोगों को प्रणाम करना भूल गए हैं। इसके पहले वे बहुत व्यहवारिक थे। हमेशा
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