ग़ज़ल
ख़्वाबों में मेरे आते हैं।
कितना अच्छा बतियाते हैं।।
मिलकर तो गुलज़ार हुआ मन।
मुझको तुम बहुत सुहाते हो।।
संगीत सुनो तो मन बहले।
नित्य मधुर साज बजाते हो।।
तुम दिख जाते स्पंदन होता।
धड़कन में रोज़ समाते हैं।।
मौसम आज बहारों का है।
रोज़ भ्रमण को हम जाते हैं।।
बात मिलन की अच्छी होती।
मिलते हो बस मुस्काते हैं।।
बात करो आज मुहब्बत की।
क्यों पीछा आज छुड़ाते हैं।।
— रवि रश्मि ‘अनुभूति’
