पोस्ट वुमेन
मैं आँगन में कपड़े सूखा रही थी कि एक प्यारी सी आवाज सुनाई दी-“आंटी आपका पोस्टल पार्सल है।’
मैंने पीछे पलट कर देखा।एक तेईस-चौबीस साल की लड़की सायकल को स्टैंड करती कह रही थी।
मैंने उससे पूछा-तुम कौन हो?
उसने मुस्कुराते हुए कहा-“आपकी नई पोस्ट वुमेन।”
पोस्ट वुमेन?अरे भई, मेरी उम्र आज साठ बरस हो गई पर आज तक पोस्ट वुमेन शब्द नही सुना।बचपन से पोस्ट मेन-पोस्ट मेन यही सुनती आई हूं। वो पोस्टमेन कहाँ गया?
मेरे इस प्रश्न पर उसने खिलखिलाकर हंसते हुए कहा-“हां आंटी, सब मुझे पोस्ट वुमेन को देखकर आश्चर्य करते हैं पर आँटी आज लड़कियां घर में चौका-चूल्हा संभालते हुए पुरुषों का हर काम संभाल रही हैं चाहे काम कितना भी कठिन हो।वे अंतरिक्ष में भी उड़ रही हैं तो इस काम के लिए आश्चर्य क्यों?”यह कहती हुई वह व्यस्त भाव से अपनी साइकिल पर चली गई।मैं “पोस्ट वुमेन-पोस्ट वुमेन शब्द दोहराने लगी।
— डॉ. शैल चन्द्रा
