इसी दुनिया में आज
इसी दुनिया में
अखबार की
सुर्खियों से भरी खबरें
पढ़ी होंगी पाठकों ने।
आया होगा
फुरसत से भरा रविवार।
महकी होगी कोई क्यारी ,
खिला होगा कोई फूल।
छिड़ी होगी कोई धुन,
तैर गई होगी कोई सिम्फ़नी हवा में।
इसी दुनिया में
बना रहा होगा
कोई मन का ताजमहल ,
अंडों से निकल रहे होंगे बच्चे।
आज फिर कोई गौरैया ,
फुदक रही होगी
जंगल में आज।
नील गगन की सीमा पाने ,
उड़ रहा होगा कोई पंछी
उन्मुक्त, आज।
— विकास कुमार शर्मा
