सावन पर कवित्त
कवित्त – 1. आगमनघन घुमड़ घुमड़ आए, दामिन दमके अम्बर,पवन बहे पुरवाई, महके चंदन का कंवर।धरती ने ओढ़ी हरियाली, पहने
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Read Moreऑफिस की लिफ्ट खराब थी। 8वीं मंजिल। बॉस ने सुबह ही कह दिया था – “रिपोर्ट आज चाहिए, नहीं तो
Read Moreतुमसे मिलनाजैसे सूर्य रश्मियां ,आई हो आंगन में ।जैसे कोई चिड़ियाउड़ी हो आसमान में ।फूटा हो कोई कोंपल ,हिचकी आई
Read Moreइसी दुनिया मेंअखबार कीसुर्खियों से भरी खबरेंपढ़ी होंगी पाठकों ने।आया होगाफुरसत से भरा रविवार।महकी होगी कोई क्यारी ,खिला होगा कोई
Read Moreकहां गया वो बचपन?कपड़े की गेंद सेसतोलिया खेलना ,खाली माचिस सेरेलगाड़ी बनानावो पकड़म – पकड़ाईघोड़ा जमाल खाईपीछे देखे मार खाई।कागज़
Read Moreफरवरी का महीनालेकर आता हैअंजुरी भर हरसिंगारकुछ गुलाबऔर मौलसिरी के फूल।वासंतीमधुमाती गंधहवा में फैलने के लिएऔर ढेर सारा प्यारहर एक
Read Moreहे जग-जननीहे कल्याणीमैं तेरे गुण गाऊंतेरे चरणों मेंनित-नितशीश झुकाऊं।माँ तू हैवरदायिनीहम बालक नादानक्षमा करनाभूल हमारी।ब्रह्मचारिणी सेसिद्धि दात्रीअनेक रूप हैं तेरे,माँ
Read Moreमेरे पास और कुछ हो न हो एक दीप है जो प्रज्वलित है आत्मा की ऊष्मा से जो आलोकित है
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