पुस्तक समीक्षा

‘सब अंधकार मिट जाएगा’: वैचारिक प्रदीप्ति और जिजीविषा का काव्य-संग्रह

साहित्य संगम बुक्स प्रकाशन मंडल द्वारा प्रकाशित साझा संकलन ‘सब अंधकार मिट जाएगा’ समकालीन काव्य-क्षितिज पर एक ऐसी तेजोमय उपस्थिति है, जो निराशा के घनीभूत तिमिर के विरुद्ध ‘शब्द-साधना’ का उद्घोष करती है। यह संकलन केवल कविताओं का पुंज मात्र नहीं है, अपितु मानवीय जिजीविषा और सृजनात्मक चेतना का एक ऐसा ‘वैचारिक महाकुंभ’ है, जिसमें विभिन्न रचनाकारों की अनुभूतियाँ समाहित हुई हैं।

१. शीर्षक की सार्थकता और दार्शनिक अधिष्ठान

संकलन का शीर्षक ‘सब अंधकार मिट जाएगा’ अत्यंत ही मार्मिक एवं गत्यात्मक है। यह उपनिषदों के ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के मूल मंत्र का आधुनिक काव्यानुवाद प्रतीत होता है। यहाँ ‘अंधकार’ केवल प्रकाश का अभाव नहीं है, वरन यह समाज में व्याप्त विसंगतियों, कुंठाओं, और जड़ता का प्रतीक है। संकलित रचनाएँ इस अंधकार को चीरकर एक नव-विहान की स्थापना करने का संकल्प व्यक्त करती हैं।

२. कथ्य की व्यापकता और भाव-तरंगें

इस संकलन के अंतस में उतरने पर हमें भावों की त्रिवेणी प्रवाहित होती दिखाई देती है। इसमें जहाँ एक ओर वैयक्तिक वेदना के स्वर हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सरोकारों के प्रति एक तीक्ष्ण उत्तरदायित्व का बोध भी है।

  •   सकारात्मकता का अन्वेषण: अधिकांश रचनाएँ हताशा के मध्य आशा की रश्मियों को खोजने का स्तुत्य प्रयास करती हैं।
  •  यथार्थ का प्रकटीकरण : रचनाकारों ने समसामयिक विद्रूपताओं को अपनी लेखनी के माध्यम से अत्यंत प्रामाणिक एवं पारदर्शी रूप में उकेरा है।

३. भाषा-शिल्प और बिम्ब-विधान

साहित्य संगम बुक्स के इस संकलन की भाषा परिमार्जित एवं सुसंस्कृत है। रचनाकारों ने क्लिष्ट शब्दावली का प्रयोग इस प्रकार किया है कि वे भावों की गंभीरता को अक्षुण्ण रखते हुए पाठक के हृदय को स्पंदित करती हैं। शब्दों का चयन केवल वर्णनात्मक न होकर प्रतीकात्मक है, जो काव्य में एक विशिष्ट सौन्दर्यशास्त्रीय बोध उत्पन्न करता है।

४. संपादकीय सुघड़ता और मुद्रण वैभव

संस्थान की परंपरा के अनुरूप, प्रगति दत्त जी एवं संस्थान प्रमुख ने इस पुस्तक का संपादन भी अत्यंत वैज्ञानिक एवं विधागत शुद्धता के साथ किया गया है। नवांकुर रचनाकारों की प्रस्तुति में जो परिपक्वता दृष्टिगोचर होती है, वह संपादक मंडल के सूक्ष्म पर्यवेक्षण का प्रतिफल है। मुद्रण की गुणवत्ता और आवरण की कलात्मकता पुस्तक की संग्रहणीयता में अभिवृद्धि करती है।

निष्कर्ष

‘सब अंधकार मिट जाएगा’ वस्तुतः शब्द-शिल्पियों का एक ऐसा सामूहिक अनुष्ठान है, जो साहित्य की उर्वरता को अक्षुण्ण रखने हेतु प्रतिबद्ध है। यह साझा संकलन सिद्ध करता है कि यदि भावों में शुचिता और संकल्प में दृढ़ता हो, तो साहित्य के माध्यम से समाज का कल्याणकारी अभ्युदय सुनिश्चित है। यह कृति प्रत्येक सुधी पाठक के लिए एक वैचारिक पाथेय सिद्ध होगी।

– अमित पाठक शाकद्वीपी

अमित पाठक शाकद्वीपी

बोकारो, झारखंड। संपर्क सूत्र ; 8935857296