कविता

शिव संदेश

दूर कैलाश से जब शिव स्वर गूंजे,
मानवता का सच्चा संदेश सुनाएँ।
न कोई धर्म, न कोई जाति का भेद,
सबमें एक ही चेतना, एक ही वेद।

नीलकंठ बन जग को राह दिखाते,
दुख सहकर सबका कल्याण करते।
त्याग, करुणा और समता का सार,
शिव में समाया सारा संसार।

मोह-माया का अंत है निश्चित,
संतोष में ही परम सुख निहित।
भौतिकता में यदि उलझा मन,
वह खो देता जीवन का धन।

शिव का संदेश हमें यह बताता,
प्रकृति से ही जीवन मुस्काता।
संतुलन में ही सृष्टि का सार,
यही है जीवन का सच्चा आधार।

आओ फिर से यह प्रण करें,
प्रकृति संग जीवन यापन करें।
मानवता को धर्म बनाएँ,
शिव के पथ पर कदम बढ़ाएँ।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com