हाइकु/सेदोका

हाइकु

फूल खिलें हैं
मुस्कराई बगिया
फाग राग में

कहे कहानी
तितली का उड़ना
भौरों का गाना

सर्दी ना गर्मी
दिन आये सुहाने
तुम भी आना

आने वाली है
होलिका मतवाली
रंगों के साथ

रंग चाहते
आपस में मिलना
छोड़ द्वेष को

फैली खेतों में
रूप बदलकर
श्रम की बूंदें

गेंहू की बाली
लहरा लहरा के
पास बुलाये

फाग का जादू
छोड़े प्रेम चंपई
कण कण में

फागुन लाता
खुशी चेहरों पर
खोल पिटारा

इसी बहाने
लिख डाले हाइकु
व्यग्र कवि ने

— व्यग्र पाण्डे

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)322201