कविता

नारी तुम हो महान

हर मोड पर नारी करती है बलिदान,
हर रिश्ते को निभाने में इनका है बड़ा योगदान इसलिए नारी तुम हो महान।
बेटी होकर मायके के प्रति निभाती है जिममेदारी,
बहु बनकर हर रिश्ते को अपनाती है,सोचकर ससुराल की जिम्मेवारी।
रिश्ते की डोर में बंधते है दो इंसान,
किंतु हर मोड पर नारी ही करती है समझौता और बलिदान।
अजीब होती है औरत की जिन्दगी,
फूंक-फूंक के जीती है रोज़-मर्रा की जिंदगी।
बेटी जब बन जाती है बहु,
तब शुरू होती है उसके जिन्दगी का जंग शुरू।
उन्मुक्त गगन की पंछी बंध जाती है रिश्तो की डोर में,
जिम्मेदारी निभाते-निभाते खो जाती है रिश्तो की होड़ में।
इस होड में भी बनाए रखा है हर क्षेत्र में अपना नाम,
यू ही नहीं कहते नारी तुम हो महान।

— अनुपमा

अनुपमा प्रधान

पिता - स्वर्गीय अर्जुन प्रधान प्राइमेरी शिक्षिका, आर्मी पब्लिक स्कूल हैप्पी वैली 37 Jhalupara Cantt East Khasi Hills Shillong, Meghalaya 793002 मोबाइल 8729987292 ईमेल anupamapradhan43855@gmail.com शैक्षिक योग्यता MA.BED English, BA Hindi Assam Rashtra Bhasha dwara