कविता

उड़ रहे हैं अबीर गुलाल

खेले होली राधिका संग कन्हाई रे,
उड़ रहे हैं अबीर गुलाल होली आई रे।

रंग लाल गुलाबी नीले पीले केसरिया,
भर-भर पिचकारी छोड़ें देखो सांवरिया,
भीगा सब श्रृंगार, पायलिया करें झंकार,
सखी री ब्रज में छाया “आनंद” अपार,
धरती अंबर अनहद खुशियॉं छाई रे ।

भक्ति रंग में रंगी वृन्दावन की गलियॉं,
मधुर-मधुर गोपाल ने बजाई मुरलिया,
झूमें हैं नर-नार, बही प्रेम की रस धार,
जय हो श्री श्यामा श्यामजू सरकार,
चहूॅं दिश उत्सव ने धूम मचाई रे ।

खिल उठी प्रभु कृपा से जीवन बगिया,
धन्य-धन्य हुई दर्शन की प्यासी अखियॉं,
नवधा भक्ति में सराबोर, वंदन करें बारम्बार,
होरी के रसिया की जय बोले संसार,
भगवान ने भक्तों पर कृपा बरसाई रे ।

खेले होली राधिका संग कन्हाई रे,
उड़ रहे हैं अबीर गुलाल होली आई रे ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु