स्वास्थ्य

ज़मीन पर बैठकर खाने के कमाल के फ़ायदे …

आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में हम टेबल और कुर्सियों पर खाते है. लेकिन हमारी परंपरा में, ज़मीन पर जांघों के बल बैठकर खाने के पीछे एक बहुत बड़ा हेल्थ साइंस है! आइए जानते हैं–

1) डाइजेशन बेहतर होता है
अपनी जांघों के बल (अर्ध पद्मासन जैसी पोज़िशन में) बैठने से पेट के पास की मसल्स को नैचुरल मूवमेंट मिलता है। खाने के लिए आगे की ओर झुकना-सीधा होना डाइजेशन प्रोसेस को ज़्यादा एक्टिव बनाता है।

2) वज़न कंट्रोल में रखता है
ज़मीन पर बैठकर खाने पर, खाने की स्पीड अपने आप धीमी हो जाती है। इससे दिमाग को समय पर पेट भरा होने का सिग्नल मिल जाता है और ज़्यादा खाने से बचा जा सकता है।

3) बॉडी की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाता है
पद्मासन जैसी पोज़िशन में बैठने से कमर, पीठ और घुटने फ्लेक्सिबल रहते हैं। मसल्स में हल्का खिंचाव आता है और शरीर ज़्यादा काबिल बनता है।

4) मन शांत होता है
फर्श पर बैठने से खाने पर फोकस करने में मदद मिलती है। मन शांत रहता है और खाने में मौजूद न्यूट्रिएंट्स बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब होते हैं।

5) परिवार में प्यार बढ़ता है
साथ में खाने से बातचीत बढ़ती है, स्ट्रेस कम होता है और परिवार के रिश्ते मजबूत होते हैं।

6) पोस्चर बेहतर होता है
रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, और कंधे, पेट और पीठ ठीक से हिलते हैं। इससे शरीर पर फालतू का स्ट्रेस कम होता है।

7) लंबी उम्र की निशानी
यूरोपियन जर्नल ऑफ़ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग बिना सहारे के आसानी से फर्श से उठ सकते हैं, उनकी फिजिकल क्षमता और लाइफ एक्सपेक्टेंसी बेहतर होती है।

8) घुटने और जोड़ मजबूत रहते हैं
रेगुलर फर्श पर बैठने से घुटने, टखने और कमर फ्लेक्सिबल रहते हैं और जोड़ों का दर्द कम करने में मदद मिलती है।

9) ब्लड फ़्लो बेहतर होता है
इस तरह बैठने से शरीर में ब्लड फ़्लो बैलेंस रहता है और डाइजेशन के लिए ज़रूरी एनर्जी मिलती है।

छोटा सा बदलाव… बड़ा फ़ायदा!
दिन में कम से कम एक बार अपने परिवार के साथ फ़र्श पर बैठने की आदत डालें और खुद फ़र्क महसूस करें।