अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, भारतीय मातृशक्ति की अमर गाथा
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है, जो भारतीय नारी शक्ति की महिमा का उत्सव है। जो हमारे उल्हास को उड़ान देता है,भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ संस्कृति और परंपरा जीवन का आधार स्तंभ हैं, यह दिवस मात्र एक तिथि तक सीमित नहीं, बल्कि मातृशक्ति की स्मृति का प्रतीक है। हमारी भारतीय मातृशक्ति वह शक्ति है जो माँ यशोदा से लेकर आज की स्वावलंबी महिला उद्यमी तक फैली हुई है। यह आलेख उसी भारतीय नारी की विस्तृत गाथा बयान करता है, जो कठिनाइयों से जूझकर भी परिवार, समाज और राष्ट्र को रोशन करती है।
भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति की पवित्रता स्पष्ट परिलक्षित है।
भारतीय संस्कृति में नारी को आदि शक्ति माना गया है। वेदों और पुराणों में देवियाँ ,दुर्गा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी – शक्ति के प्रतीक हैं। रामायण में सीता माता त्याग और धैर्य की मूर्ति बनीं, वहीं महाभारत की द्रौपदी ने अन्याय के विरुद्ध विद्रोह का उदाहरण प्रस्तुत किया। गृहस्थ जीवन में माँ वह आधार स्तंभ है, जो संतान को संस्कार देती है। होली जैसे त्योहारों में राधा-कृष्ण की लीला हमें नारी की प्रेमपूर्ण शक्ति की याद दिलाती है। आज भी ग्रामीण भारत की महिलाएँ खेतों में मेहनत करती हैं, घर संभालती हैं और बच्चों को संस्कृति परंपराओं का स्नेह दूध पिलाती हैं। यह मातृशक्ति है जो भारत की आत्मा को जीवंत रखती है। संघर्ष और विजय की कहानियाँ
भारतीय परिवेश में देखने को मिलती हैं,नारी ने असंख्य बाधाओं को पार किया है। स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने तोपों के आगे तलवार उठाई, सरोजिनी नायडू ने कविता से क्रांति की लहर दौड़ाई। आधुनिक भारत में कल्पना चावला अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कोविड महामारी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं आशा कार्यकर्ता ,एवं आशा सहयोगी बहनों और नर्सों ने मातृभाव से सेवा की, जो भारतीय मातृशक्ति का जीवंत प्रमाण है। ये उदाहरण बताते हैं कि हमारी नारी न केवल सहनशील है, बल्कि परिवर्तन की धुरी भी हैं।
आज का भारत डिजिटल क्रांति और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों से नारी को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है। इंदिरा गांधी जैसी नेताओं से लेकर किरण बेदी तक, महिलाएँ हर क्षेत्र में छाई हैं। योग और आयुर्वेद जैसी परंपराओं में भी महिलाएँ आगे हैं , फिर भी चुनौतियाँ बाकी हैं, क़दम सशक्त उत्साह से भरे हुए हैं, महिला दिवस हमें संकल्प दिलाता है कि मातृशक्ति को और मजबूत बनाएँ, ताकि भारत विश्व गुरु बने।
भारतीय मातृशक्ति वह ज्योति है जो अंधकार को चीरती है। यह दिवस हमें प्रेरित करे कि हर नारी को सम्मान, अवसर और सुरक्षा मिले। आइए, हम सब मिलकर वचन लें ,नारी शक्ति को प्रणाम करें और उसके कदमों में राष्ट्र का भविष्य देखें।
जय माता दी!
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह
