ग़ज़ल – चलो सजनी चले आओ
चलो सजनी चले आओ, मलेंगे रंग होली में।
चले लेने तुझे आए, उठा लें आज डोली में।
यही *फागुन रॅंगीला था,मिली थी आज के ही दिन,
मिली थी आंख होली में, गई भीगी रॅंगोली में।
उठा घुंघट निहारे है, तुझे साजन मुहब्बत में,
चुरा के रख लिया मेरा, छुपा के *प्रेम चोली में।
लगी थी आस मिलने की, बहाना खूब होली का,
लुटा दूं आज जी भर के, सदा का प्यार झोली में।
करूॅं तारीफ मैं कितनी, बड़ी सुंदर लगे प्यारी,
सभी को खींच लेती है, बड़ा आनंद बोली में।
सजा है त्योहार होली का, भुला दें वैर नफरत को,
बने अपने सभी साथी, मजा “शिव “आज टोली में।
— शिव सन्याल
