मेरी साइकिल
सरपट- सरपट दौड़ लगाती
नित व्यायाम खूब कराती
गांव-गांव, गली- गली घुमाती
मेरी साइकिल खूब सैर कराती ।
बिना ईंधन के चलती जाती
मन मेरा खूब बहलाती
साथ-साथ बौझा भी उठाती
मेरी साइकिल खूब सैर कराती ।
पर्यावरण की सच्ची मित्र कहाती
हर तरह के प्रदूषण से दूर रहती
धीमे-धीमे मंजिल तक पहुंचाती
मेरी साइकिल खूब सैर कराती ।
गुस्सा ये कभी न करती
हो जाए खराब तो, बोझ न बनती
मंजिल तक हर हाल में साथ चलती
मेरी साइकिल खूब सैर कराती।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
