दशा माता चालीसा
दोहा
जय दशा माता दयामयी, भक्तों की आधार।
तुमसे ही शुभ भाग्य है, तुमसे ही संसार॥
चौपाई
जय-जय दशा माता सुखदायी।
भक्त जनों की तुम सहाई॥1॥
करुणा सागर, मंगल धामा।
जपते सब तुम्हारा ही नामा॥2॥
दीन दुखी की तुम रखवाली।
काटो संकट,मां तारणवाली॥3॥
श्रद्धा से जो शीश नवावे।
जीवन पथ उज्ज्वल हो जावे॥4॥
ममता की तुम गंगा धारा।
भवसागर की तुम ही सहारा॥5॥
गाँठों में विश्वास बसाओ।
भक्तों का तुम मान बढ़ाओ॥6॥
घर-आँगन सुख शांति बसाओ।
हर विपदा को दूर भगाओ॥7॥
तुमसे जग में शुभता आती।
बद् किस्मत भी मुस्काती॥8॥
धैर्य, धर्म का पाठ पढ़ाती।
संकट में भी राह दिखाती॥9॥
सच्चे मन जो व्रत अपनावे।
दशा माता सुखफल पावे॥10॥
भक्ति दीप जब मन में जलता।
जीवन का अंधकार भी ढलता॥11॥
तेरी महिमा अपरंपारा।
गावे जग सारा संसारा॥12॥
नारी शक्ति का रूप निराला।
तुमसे जग में मंगल उजाला॥13॥
अटल विश्वास हृदय में जागे।
तेरी कृपा से भय सब भागे॥14॥
सुख समृद्धि तुम घर लाओ।
भक्तों का जीवन महकाओ॥15॥
दुख दरिद्रता दूर भगाओ।
भाग्य सितारे फिर चमकाओ॥16॥
तेरी शरण जो कोई आवे।
जीवन सफल वही हो जावे॥17॥
कठिन समय में धैर्य दिलाती।
सच्ची राह सदा दिखलाती॥18॥
तेरे व्रत की महिमा न्यारी।
हर लेती विपदा भारी॥19॥
मन में सदा तुम्हें जो ध्यावे।
सुख की फसल वही उगावे॥20॥
तुम ही शक्ति, तुम ही माया।
तेरी कृपा जगत पर छाया॥21॥
भक्तों का तुम मान बढ़ाती।
संकट की दीवार गिराती॥22॥
नव आशा का दीप जलाओ।
हर मन को विश्वास दिलाओ॥23॥
ममता, दया, प्रेम की धारा।
बहती तुमसे जग सारा॥24॥
सत्य धर्म की राह बताओ।
जीवन को आदर्श बनाओ॥25॥
तेरे चरणों में सुख पाया।
तेरी भक्ति ने पथ दिखलाया॥26॥
भय, संशय सब दूर भगाओ।
साहस का संचार कराओ॥27॥
संकट में जो तेरा गावे।
वह जीवन में विजय पावे॥28॥
कृपा दृष्टि जब तुम कर देती।
सूनी झोली भी भर देती॥29॥
भक्तों के तुम प्राण सहारा।
तुमसे जग में मंगल सारा॥30॥
तेरी महिमा वेद बखाने।
ऋषि मुनि भी गुणगान गाने॥31॥
सच्चे भाव से जो ध्याता।
वह पाता सुखदाता माता॥32॥
अज्ञान तम सब दूर हटाओ।
ज्ञान सुधा मन में बरसाओ॥33॥
संकल्पों को शक्ति दिलाओ।
जीवन में उत्कर्ष बढ़ाओ॥34॥
भक्ति भाव मन में बसाओ।
सद्गुणों की राह दिखाओ॥35॥
तेरी कृपा जब साथ निभाती।
हर बाधा भी राह बनाती॥36॥
सत्य कर्म का दीप जलाओ।
मानवता का पाठ पढ़ाओ॥37॥
तेरे चरणों की महिमा गाऊँ।
जीवन सफल तुम्हें ही पाऊँ॥38॥
दशा माता कृपा बरसाओ।
भक्तों का उद्धार कराओ॥39॥
जय जय जय जगजननी माता।
तुम बिन कौन जगत का त्राता॥40॥
दोहा
जो यह चालीसा पढ़े, श्रद्धा भाव समेत।
दशा माता कृपा करें, सुख बरसे हर क्षेत्र॥
— गोपाल कौशल भोजवाल
