बाल मन में शिक्षा, संस्कार, देशभक्ति और प्रकृति प्रेम जगाता है प्रेरणादायी कविता संग्रह ‘चलो स्कूल’

बाल साहित्य बच्चों के कोमल मन को शिक्षा, संस्कार और कल्पनाशीलता से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम होता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा द्वारा रचित बाल कविता संग्रह ‘चलो स्कूल’ एक सुंदर और प्रेरणादायी कृति के रूप में सामने आता है। यह कविता संग्रह बच्चों को शिक्षा और जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित करने का प्रयास करता है।
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा हिंदी साहित्य के एक बहुआयामी और सक्रिय रचनाकार हैं। उनकी लेखन-विधाओं में कविता, कहानी, बाल साहित्य, व्यंग्य, संस्मरण, लघुकथा, समीक्षा, हाइकु, शोधलेख तथा जीवनी जैसी विविध साहित्यिक विधाएँ शामिल हैं। उनकी रचनात्मक सक्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की शताधिक स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में उनकी 1000 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उनके 36 शोधपत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं।
इस बाल कविता संग्रह में कुल 40 कविताएँ संकलित हैं, जो बालकों की रुचि, कल्पनाशीलता और उनकी मानसिक दुनिया को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं। सरल, सहज और मधुर भाषा के माध्यम से कवि ने बच्चों के जीवन, उनकी कल्पनाओं, खेल-कूद, प्रकृति और विद्यालय से जुड़े विभिन्न अनुभवों को अत्यंत आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि इन कविताओं को पढ़ते समय बाल पाठकों के साथ-साथ बड़े पाठकों को भी आनंद की अनुभूति होती है।
इस कविता संग्रह को पढ़ते समय यह भी अनुभव होता है कि इसमें बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें विद्यालय जाने और अध्ययन के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया है। साथ ही कविताओं के माध्यम से बच्चों के मन में देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और संस्कारों के प्रति सम्मान, प्रकृति के प्रति प्रेम, बचपन की स्वाभाविक खुशियाँ तथा जीवन में संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान की गई है।
कविता संग्रह की विशेषता यह है कि इसकी भाषा अत्यंत सरल और सरस है, जिससे बच्चे आसानी से उसे समझ सकते हैं। कविताओं में लयात्मकता और भावों की स्वाभाविकता दिखाई देती है, जो बाल साहित्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है। इसके अतिरिक्त कविताओं के माध्यम से बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि, अनुशासन और अच्छे संस्कारों का संदेश भी दिया गया है।
इस कविता संग्रह का पृष्ठ-आवरण भी अत्यंत सुंदर और आकर्षक है, जो बालकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। साथ ही यह संग्रह की विषय-वस्तु के अनुरूप एक सजीव वातावरण प्रस्तुत करता है।
समग्र रूप से कहा जा सकता है कि ‘चलो स्कूल’ बाल साहित्य की एक सराहनीय कृति है, जो बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश भी देती है।
इस सुंदर बाल कविता संग्रह के लिए कवि डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
समीक्षक – हितेश्वर बर्मन चैतन्य
पुस्तक — चलो स्कूल (बाल कविता संग्रह)
कवि — डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
विधा — कविता
प्रकाशन वर्ष — 2026
कुल पृष्ठ — 48
मूल्य — 100/- रुपए
