धैर्य की गहराई
सागर की लहरें
धीरे-धीरे किनारे को छूती
समय सबको सिखाए
बादलों के बीच
सूरज की किरणें झिलमिलाएं
अँधेरा दूर होता
पेड़ों की छाँव में
पंछी गीत गाते हैं शांति से
सहनशीलता का पाठ
बर्फ की चादर
धीरे-धीरे पिघलती रहती
धैर्य से सब बदलता
पत्तों की सरसराहट
हवा के संग बहती जाए
समझ का संदेश
रात की चुप्पी
सितारे गवाह बने शांति के
धैर्य की राह दिखाए
नदी की धारा
पत्थरों को घिसकर भी आगे बढ़े
अडिग विश्वास
फूलों की खुशबू
धीरे-धीरे फैलती सब ओर
धैर्य का सौंदर्य
मौन की शक्ति
कभी शब्द से अधिक बोले
शांति का मंत्र
सूरज ढलते हैं
नव दिन का आभास देते
धैर्य का संकेत
बारिश की बूंदें
भूमि को सींचकर जीवन दें
सहनशीलता सिखाएं
पर्वत अडिग
सदियों तक खड़े रहते
धैर्य का उदाहरण
समय की चाल
धीरे-धीरे सबको बदल दे
धैर्य की गहराई
— डॉ. अशोक
