अमेरिकी लोकतंत्र की परीक्षा : कांग्रेस बनाम ट्रम्प और ईरान युद्ध का जवाबदेही संकट
17 मार्च 2026 को जब ईरान युद्ध अपने 17वें दिन में है, तब वाशिंगटन में एक और मोर्चा खुला हुआ है — राष्ट्रपति ट्रम्प बनाम अमेरिकी कांग्रेस। Military.com की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में यह युद्ध तीसरे सप्ताह में पहुँच चुका है लेकिन अमेरिकी कांग्रेस ने अभी तक इस युद्ध की सार्वजनिक सुनवाई नहीं की है। रिपब्लिकन सांसद युद्ध की जाँच-पड़ताल के लिए सुनवाई बुलाने के डेमोक्रेटिक माँगों का विरोध कर रहे हैं जिससे ट्रम्प और उनके विपक्षियों के बीच एक नया टकराव पैदा हो गया है। सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने सीनेट फ्लोर पर कहा — ‘डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य-पूर्व में अराजकता पैदा की है और उनके पास इसे खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है। यह हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है।’ शूमर ने ट्रम्प पर ‘असंगत संदेश’ देने का भी आरोप लगाया — एक तरफ कहना कि ‘ईरानी संपर्क में हैं और सौदा करना चाहते हैं’ और दूसरी तरफ यह कहना कि ‘उनके सभी नेता मर चुके हैं।’
युद्ध की जवाबदेही का यह सवाल अमेरिकी संविधान और लोकतंत्र की बुनियाद को छूता है। अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1 के तहत युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस को है। लेकिन 1973 के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के तहत राष्ट्रपति 60 दिन तक बिना कांग्रेस की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। ट्रम्प ने इसी का उपयोग किया। लेकिन कांग्रेस के कई सदस्यों ने — रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों में से — मतदान की माँग की है। Military.com के अनुसार अमेरिकी कांग्रेस अभी तक ट्रम्प के प्रशासन से सार्वजनिक रूप से इस युद्ध पर जाँच नहीं कर पाई है। यह एक लोकतांत्रिक विफलता है क्योंकि जनप्रतिनिधियों को यह जानने का अधिकार है कि उनके देश के सैनिक किस उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं और किस रणनीति से।
अमेरिकी सैनिकों की जान और युद्ध का हिसाब
Military.com ने एक विशेष रिपोर्ट में बताया कि इस युद्ध में अब तक 12 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। 12 मार्च को पश्चिमी इराक के ऊपर KC-135 रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटना में 6 सैनिक मारे गए जिनकी पहचान Maj. John A. Klinner, Capt. Ariana G. Savino और Tech. Sgt. Ashley B. Pruitt सहित अन्य के रूप में हुई। एक Florida Army Major — Capt. Cody — भी इस युद्ध में मारे गए जिनकी याद में एक endowed scholarship स्थापित किया गया है। इन सैनिकों की मौतें एक ऐसे युद्ध में हो रही हैं जिसे न कांग्रेस ने अधिकृत किया, न अमेरिकी जनता की बहुमत की राय में शुरू होना जरूरी था। NBC News के एक नए सर्वे के अनुसार अमेरिका में पंजीकृत मतदाताओं में अब इजराईल को नकारात्मक रूप से देखने वालों की संख्या सकारात्मक रूप से देखने वालों से अधिक हो गई है। यह बदलाव खासकर निर्दलीय और डेमोक्रेट मतदाताओं में तेज है जो 2026 के मध्यावधि चुनावों और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करेगा।
इस युद्ध ने अमेरिका में कई संस्थाओं और प्रक्रियाओं को परखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को IEEPA टैरिफ को 6-3 से अवैध घोषित किया था — वही कोर्ट अब युद्ध की संवैधानिकता पर भी एक दिन फैसला कर सकती है। अमेरिकी मीडिया को ट्रम्प ने ‘फेक न्यूज’ बताया जब NYT और WSJ ने इस युद्ध में अमेरिका को हुए नुकसान की रिपोर्ट की। FBI ने California के पुलिस विभागों को चेतावनी दी है कि ईरान अमेरिकी पश्चिमी तट पर ड्रोन हमले कर सकता है। यानी यह युद्ध अब अमेरिका की सीमाओं के भीतर भी एक सुरक्षा खतरा बन रहा है। 16 मार्च को Dubai हवाई अड्डे के पास आग ने उड़ानें अस्थायी रूप से रोकीं — यह छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि दुबई हवाई अड्डा दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
युद्ध और अमेरिकी जनमत का बदलता रुख
Middle East expert Sina Azodi ने Military.com को बताया कि यह युद्ध अमेरिका के लिए सैन्य दृष्टि से अच्छा जा रहा है लेकिन ‘अन्य कोण से नहीं।’ यह ‘अन्य कोण’ वे हैं जो अमेरिकी लोकतंत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं — आर्थिक कीमत, अंतरराष्ट्रीय साख, सहयोगियों की नाराजगी और घरेलू राजनीतिक विभाजन। अमेरिका में पेट्रोल 3.79 डॉलर प्रति गैलन हो गई है — 3 अक्टूबर 2023 के बाद सबसे ऊँचा स्तर। यह हर उस अमेरिकी की जेब पर असर डाल रही है जो कार से काम पर जाता है। 2026 की मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं और जब तेल महंगा हो, रोजगार दबाव में हों और एक अनिश्चित विदेश युद्ध चल रहा हो, तब मतदाता बदलाव की माँग करते हैं। ट्रम्प इस राजनीतिक गणित को समझते हैं — इसीलिए वे बार-बार कहते हैं कि ‘युद्ध जल्द खत्म होगा’ — लेकिन जमीन पर ऐसा नहीं हो रहा।
यह युद्ध अमेरिकी लोकतंत्र के बारे में एक गहरा सवाल उठाता है — क्या एक राष्ट्रपति जनप्रतिनिधियों की अनुमति के बिना, सहयोगियों को बताए बिना, कांग्रेस के अधिकृत युद्ध घोषणा के बिना एक बड़ा युद्ध शुरू कर सकता है? 1973 के वॉर पावर्स एक्ट का उद्देश्य यही था कि 1964 के गल्फ ऑफ टॉनकिन प्रस्ताव जैसी गलती न दोहराई जाए जिसने वियतनाम युद्ध को गहराया। लेकिन वह कानून आज भी कमजोर साबित हो रहा है। चक शूमर का यह कहना कि ‘ट्रम्प के पास कोई योजना नहीं’ — यह केवल विपक्षी बयानबाजी नहीं है। यह एक गंभीर संस्थागत प्रश्न है जिसका उत्तर तलाशना अमेरिकी लोकतंत्र के भविष्य के लिए जरूरी है।
— पूनम चतुर्वेदी शुक्ला
