राजनीति

उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में अयोध्या की भूमिका

भारत के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने एक दीर्घकाल तक विकास की परिधि पर खड़े रहने की नियति को स्वीकार किया था। BIMARU राज्यों के उस संकुचित समूह में जहाँ UP की गणना होती थी, वहाँ से निकलकर एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का संकल्प लेना असाधारण महत्त्वाकांक्षा का प्रदर्शन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनेक अवसरों पर इस लक्ष्य को दोहराया है कि उत्तर प्रदेश 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने दिसंबर 2025 में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पुनः व्यक्त की और विभागों को त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

उत्तर प्रदेश का राज्य सकल घरेलू उत्पाद 2016-17 में 12 लाख करोड़ रुपये था जो 2023-24 में बढ़कर 26 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2024-25 में यह अनुमानतः 29.78 से 32 लाख करोड़ रुपये के बीच है और 2025-26 में 36 लाख करोड़ रुपये को पार करने का अनुमान है। डॉलर में यह लगभग 335 से 375 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है। एक ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए यदि 2029-30 की समयसीमा तय की जाए तो वार्षिक 24 प्रतिशत की नाममात्र वृद्धि दर आवश्यक होगी। नीति सर्कल जैसे विश्लेषण संस्थानों ने इस लक्ष्य को महत्त्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण बताया है। किंतु सरकार का प्रति-तर्क है कि 2021-22 में 20 प्रतिशत से अधिक की नाममात्र वृद्धि पहले ही हो चुकी है और 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से 15 लाख करोड़ रुपये पहले ही क्रियान्वित हो रहे हैं।

इस राज्यव्यापी आर्थिक महायज्ञ में अयोध्या की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक है। पर्यटन और सेवा क्षेत्र किसी भी उन्नत अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उत्तर प्रदेश जो परंपरागत रूप से कृषि और श्रम-आधारित अर्थव्यवस्था रही है, सेवा क्षेत्र के माध्यम से उच्च मूल्य-संवर्धन की ओर बढ़ रहा है और अयोध्या इस संक्रमण का सबसे स्पष्ट और शक्तिशाली उदाहरण है।

श्रद्धालुओं की विस्फोटक वृद्धि और सेवा अर्थव्यवस्था का उदय
2025 के पहले छह महीनों में 23 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुँचे। यह आँकड़ा बिज़नेसटुडे और सवराज्य मैगज़ीन सहित अनेक प्रमाणित मीडिया स्रोतों में प्रकाशित हुआ। अक्टूबर 2025 के मध्य तक 22 करोड़ से अधिक दर्शनार्थी आ चुके थे जो 2024 की समग्र संख्या 16 करोड़ 44 लाख से भी अधिक थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025 में कुल संख्या 50 करोड़ पार कर सकती है। इस वृद्धि के कारण हैं — मंदिर परिसर का नवंबर 2025 में पूर्ण निर्माण, महाकुंभ 2025 का मेला-प्रवाह जो प्रयागराज से अयोध्या तक फैला, बेहतर परिवहन संपर्क और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जागरूकता।

इस विशाल तीर्थयात्री प्रवाह ने अयोध्या को एक नई सेवा अर्थव्यवस्था का आधार दिया है। दैनिक एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु और सप्ताहांत में दो लाख तक का आगमन — इसका अर्थ है होटल, धर्मशाला, रेस्टोरेंट और खाद्य स्टालों की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि। परिवहन क्षेत्र में बसें, ऑटो और ई-रिक्शा की माँग बढ़ी है। खुदरा क्षेत्र में प्रसाद, पूजन सामग्री, कपड़े और स्मृति चिह्नों की बिक्री बढ़ी है। इनमें से अधिकतर व्यापार छोटे और मझोले उद्यमियों के हाथों में है जो प्रत्यक्ष रूप से इस समृद्धि के लाभार्थी हैं। यही अयोध्या की आर्थिक शक्ति है — यह समृद्धि फ़िल्टर होकर सबसे नीचे तक पहुँचती है।

पर्यटन राजस्व: वर्तमान और 2028 का अनुमान
व्यापार मानक की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार अयोध्या का पर्यटन क्षेत्र वर्तमान में 8,000 से 12,500 करोड़ रुपये वार्षिक की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न कर रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार 2028 तक उत्तर प्रदेश का समग्र पर्यटन उद्योग 70,000 करोड़ रुपये का हो जाएगा जिसमें अयोध्या 25 प्रतिशत अर्थात 18,000 करोड़ रुपये का योगदान देगी। यह 2.1 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक पर्यटन राजस्व होगा — जो एक अकेले शहर के लिए असाधारण उपलब्धि होगी।

2023 में जब मंदिर का निर्माण जारी था, अयोध्या में 5.57 करोड़ श्रद्धालु आए थे। 2024 में यह 16 करोड़ 44 लाख हो गई। 2025 में 50 करोड़ के पार जाने का अनुमान है। इस गति से बढ़ती संख्या के अनुरूप पर्यटन राजस्व भी तेज़ी से बढ़ेगा। मंदिर का पूर्ण निर्माण — जो 25 नवंबर 2025 को पूरा हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्म ध्वजा फहराई — से तीर्थयात्री अनुभव और अधिक सम्पूर्ण होगा और यह संख्या को और बढ़ाएगा। आईसीआरए और एसबीआई रिसर्च जैसी संस्थाओं ने भी पर्यटन आय के इस तीव्र विस्तार को रेखांकित किया है।

राजस्व केवल प्रत्यक्ष पर्यटन व्यय से नहीं आता। भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों से उत्तर प्रदेश को 2024-25 में करों के रूप में 5,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्ति का अनुमान था। जीएसटी, होटल टैक्स, परिवहन कर और अचल संपत्ति लेनदेन से उत्पन्न स्टाम्प ड्यूटी — ये सब मिलकर राज्य के राजकोष को मजबूत कर रहे हैं।

रियल एस्टेट का ऐतिहासिक उछाल
अयोध्या का रियल एस्टेट बाज़ार भारत में सबसे तेज़ी से बदलते बाज़ारों में से एक बन चुका है। अनारॉक ग्रुप के अध्यक्ष अनुज पुरी ने इस बूम के पीछे तीन कारण बताए — राजनीतिक इच्छाशक्ति, धार्मिक पर्यटन और तीव्र अवसंरचना विकास। मंदिर के समीपवर्ती क्षेत्रों में भूमि मूल्य दस गुना तक बढ़ गए हैं। व्यावसायिक संपत्तियों की दरें 6,000 से 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गई हैं जो कुछ वर्ष पहले अकल्पनीय थीं। संपूर्ण नगर में संपत्ति मूल्य 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) ने अपनी एक महासभा बैठक अयोध्या में आयोजित की — यह संकेत है कि देश का शीर्ष अचल संपत्ति संगठन इस नगर में निवेश की असाधारण संभावनाएँ देख रहा है। ताज होटल्स, ITC, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स अयोध्या में विस्तार की दिशा में बढ़ रहे हैं। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हो चुके हैं। 2023 के वैश्विक निवेशक सम्मेलन में पर्यटन क्षेत्र में अकेले 18,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए।

मल्टीलेवल पार्किंग संरचनाएँ, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बजट होटल से लेकर पंचसितारा होटल तक — हर श्रेणी में निर्माण तेज़ी से हो रहा है। यह विविधता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अयोध्या के श्रद्धालु विभिन्न आर्थिक वर्गों से आते हैं। एक तरफ वे परिवार हैं जो बसों में आते हैं और 500 रुपये में एक रात गुज़ारते हैं तो दूसरी तरफ वे पेशेवर और व्यापारी हैं जो हवाई जहाज़ से आते हैं और पाँच सितारा होटलों में ठहरते हैं। दोनों के लिए सुविधाएँ उपलब्ध कराना अयोध्या की पर्यटन अर्थव्यवस्था की एक विशेषता है।

एक जिला एक उत्पाद योजना और लघु उद्योग
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना अयोध्या के आर्थिक विकास को एक नई दिशा दे रही है। अयोध्या जिले का प्रमुख ODOP उत्पाद गुड़ है। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन से जुड़े हस्तशिल्प, माला-मूर्ति उद्योग, पूजन सामग्री उत्पादन, वस्त्र और प्रसाद निर्माण के उद्योग भी पनप रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यम योजना के अंतर्गत 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं को शून्य ब्याज पर पाँच लाख रुपये तक के ऋण उपलब्ध हैं। दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 96 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके थे — यह युवाओं में उद्यमशीलता की उत्साहजनक प्रवृत्ति है।

COVID महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश वापस लौटे लगभग 40 लाख प्रवासी मजदूरों की कुशलता का मानचित्र तैयार कर उन्हें MSME से जोड़ने की पहल का उल्लेख खुद मुख्यमंत्री ने किया है। अयोध्या जैसे नवोदित आर्थिक केंद्र में इस कुशल जनशक्ति के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है। निर्माण क्षेत्र में मजदूरों की माँग, आतिथ्य क्षेत्र में सेवा-कर्मियों की माँग, परिवहन में चालकों और सहायकों की माँग और दुकानों तथा होमस्टे में कर्मियों की माँग — यह सब मिलकर एक ऐसा रोज़गार पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं जो प्रवासी मजदूरों को घर पर ही रोकने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री की सरकार ने नौ क्षेत्रों को आर्थिक वृद्धि का मुख्य चालक घोषित किया है जिनमें पर्यटन, आतिथ्य और सेवा क्षेत्र प्रमुख हैं। इन तीनों में अयोध्या की भूमिका सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने स्वयं दिसंबर 2025 की समीक्षा बैठक में अयोध्या के पर्यटन और होमस्टे नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

निर्यात क्षमता और वैश्विक भारतीय समुदाय
अयोध्या की अर्थव्यवस्था का एक और महत्त्वपूर्ण आयाम है वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय। दुनिया भर में फैले तीन करोड़ से अधिक भारतीय मूल के लोग राम जन्मभूमि मंदिर के साथ भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हैं। 2024 में 3,153 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक अयोध्या आए। यह संख्या अभी सीमित है किंतु जैसे-जैसे वैश्विक संपर्क और सुविधाएँ बढ़ेंगी, अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर और जापान की यात्राओं में क्रमशः 1.5 लाख करोड़ और 2.5 लाख करोड़ रुपये के MoU और निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए जो समग्र उत्तर प्रदेश के लिए हैं किंतु जिनका अप्रत्यक्ष लाभ अयोध्या को भी होगा।

कुबोटा कॉर्पोरेशन, स्पार्क मिंडा, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी जापानी कंपनियाँ उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। जेवर का नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक MRO और कार्गो हब बनने की दिशा में है जिससे पूरे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और व्यापारिक क्षमता बढ़ेगी। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयाँ और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ — ये सब परंपरागत क्षेत्रों से परे विविधीकरण की ओर संकेत करते हैं। इस व्यापक आर्थिक परिवेश में अयोध्या का सेवा-केंद्रित मॉडल एक संतुलित और टिकाऊ समग्र उत्तर प्रदेश अर्थव्यवस्था का एक स्तंभ है।

1 ट्रिलियन डॉलर के स्वप्न की चुनौतियाँ और यथार्थ
निष्पक्ष विश्लेषण के लिए यह स्वीकार करना आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश का 2029-30 तक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य अत्यंत महत्त्वाकांक्षी है। द वीक की एक विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान GSDP की दृष्टि से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पाँचवें स्थान पर है — महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात के बाद। प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य का स्थान और भी नीचे है। पॉलिसी सर्कल के अनुसार 335 अरब डॉलर से 1000 अरब डॉलर तक पहुँचने के लिए 24 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर चाहिए जिसे अर्थशास्त्री ‘अव्यावहारिक’ मानते हैं।

किंतु यह भी सत्य है कि उत्तर प्रदेश पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। 2016-17 में 12.5 लाख करोड़ रुपये की GSDP 2024-25 में 29.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँची — यह आठ वर्षों में दोगुने से अधिक की वृद्धि है। दिसंबर 2025 की समीक्षा बैठक में बताया गया कि 93 प्रतिशत GSDP लक्ष्य पहले ही हासिल हो चुका है और 42 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य की दिशा में काम जारी है। निवेश प्रस्तावों में 45 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये क्रियान्वित हो रहे हैं। रक्षा औद्योगिक गलियारे में निवेश आ रहा है, जेवर हवाई अड्डा बन रहा है और अयोध्या का पर्यटन उद्योग रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

इस संदर्भ में अयोध्या एक विशेष स्थान रखता है क्योंकि यह केवल एक क्षेत्रीय विकास की कहानी नहीं है — यह पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को उपर उठाने वाली एक ऐसी परियोजना है जिसमें कोई बाहरी निवेश नहीं लाना पड़ा। करोड़ों श्रद्धालु स्वयं ही आ रहे हैं, अपना पैसा खर्च कर रहे हैं और जाते समय यादें लेकर जा रहे हैं जो उन्हें फिर वापस लाएंगी।

2025 का महाकुंभ: अयोध्या अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम
जनवरी-फरवरी 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ ने अयोध्या की अर्थव्यवस्था को एक नया और शक्तिशाली आयाम दिया। महाकुंभ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आने का अनुमान था और इनमें से एक बड़ा वर्ग अयोध्या भी गया। प्रयागराज से अयोध्या की दूरी मात्र 160 किलोमीटर है और ट्रेनों व बसों के माध्यम से यात्रा सहज है। इसलिए महाकुंभ का जो धार्मिक प्रवाह था उसकी एक बड़ी धारा अयोध्या की ओर बही। मुख्यमंत्री की सरकार ने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाते हुए अयोध्या में अतिरिक्त परिवहन, आवास और सेवा सुविधाएँ तैयार की थीं।

महाकुंभ 2025 के समग्र आर्थिक प्रभाव का अनुमान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का था जिसमें से अयोध्या की हिस्सेदारी उल्लेखनीय थी। इसी काल में यात्रा-बुकिंग, होटल अधिभोग और स्थानीय व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा कि 2025 में जून तक उत्तर प्रदेश में 125 करोड़ पर्यटक आ चुके थे जो एक असाधारण आँकड़ा है।

2047 तक का मार्ग और अयोध्या का केंद्रीय महत्त्व
भारत की आजादी के 100वें वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण है। इस विकसित भारत के स्वप्न में उत्तर प्रदेश जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, की भूमिका निर्णायक होगी। और उत्तर प्रदेश के इस विकास में अयोध्या वह केंद्र होगी जो सेवा क्षेत्र, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगी।

आईआईएम लखनऊ के शोधकर्ताओं ने ‘द इकोनॉमिक रेनेसाँ ऑफ अयोध्या’ में जो चित्र खींचा है वह अयोध्या को केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि एक आर्थिक इंजन के रूप में परिभाषित करता है। यह इंजन होटलों, रेस्टोरेंटों, परिवहन सेवाओं, हस्तशिल्प उद्योगों और रियल एस्टेट क्षेत्रों को गति देता है। यह इंजन रोज़गार देता है, परिवारों की आय बढ़ाता है और स्थानीय समुदायों को सशक्त करता है। और यह इंजन तब सबसे शक्तिशाली है जब इसे किसी बाहरी ईंधन की नहीं बल्कि भारत के जनमानस की आस्था की जरूरत है जो अटूट और निरंतर है।

उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के स्वप्न में अयोध्या वह सोने की ईंट है जिसपर इस भव्य इमारत की नींव रखी जा रही है। चाहे 2029 का लक्ष्य पूरी तरह साकार हो या न हो, यह तो निश्चित है कि अयोध्या का योगदान उत्तर प्रदेश की आर्थिक कहानी में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। आस्था जब अर्थव्यवस्था से मिलती है तो जो संगम होता है वह सुरसरि की तरह पवित्र और सरयू की तरह अविरल होता है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563