कविता – जीवन साथी
साथ तेरा पाना थी मेरी किस्मत,
तुम्हें पाकर सारे गमों को किया मैंने रुकसत।
नहीं देख सकता वो मेरी आँखें नम,
उसके होते हुए मुझे छूँ ना सके कोई भी ग़म।
कमियों को मेरे उसने कभी नहीं गिनाया,
में जैसी हूँ वैसे ही उसने मुझे अपनाया ।
सुझाव सदा दिया सोचकर मेरी भलाई,
मेरे गलतियों में भी नहीं की मेरी बुराई ।
मेरे हर जिम्मेवारी में संग-संग हाथ बटाया,
मेरे हर निर्णय में बड़प्पन उसने दिखाया ।
धन्य मैं,तुम हो मेरे ज़िन्दगी का आधार,
तुम्हारे होने से ज़िन्दगी को मेरे मिला है आकार ।
— अनुपमा प्रधान
