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ईश्वर का अपना देश : केरल

केरल, जिसे “ईश्वर का अपना देश” (God’s Own Country) कहा जाता है, अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और उच्च जीवन स्तर के कारण भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है।केरल के प्रसिद्ध होने के मुख्य कारण उसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता , अलाप्पुझा और कुमारकोम के शांत बैकवाटर्स, हाउसबोट की सवारी, और नारियल के पेड़ों से घिरे नहरों का नेटवर्क दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। कोवलम, वर्कला और मारारी जैसे प्राचीन और साफ समुद्र तट यहाँ की खूबसूरती बढ़ाते हैं। मुन्नार, वायनाड और थेक्कडी जैसे चाय के बागानों से भरे हरे-भरे हिल स्टेशन सैलानियों के लिए स्वर्ग हैं। साथ ही केरल आयुर्वेद का केंद्र माना जाता है। यहाँ का पारंपरिक आयुर्वेदिक इलाज, मालिश और कायाकल्प थेरेपी विश्व प्रसिद्ध हैं। साथ ही उच्च साक्षरता और जीवन स्तर।केरल भारत का सबसे साक्षर राज्य है।
यहाँ की स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत बेहतर हैं, जिससे यह राज्य सामाजिक विकास के मामले में अग्रणी है।सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत,कला और नृत्य कथकली, कुटियाट्टम, और तेय्यम जैसे पारंपरिक नृत्य और कला रूप यहाँ की जीवंत संस्कृति को दर्शाते हैं। ओणम , विशु, पोंगल और त्रिशूर पूरम जैसे भव्य त्यौहार यहाँ की पहचान हैं।कलारीपयट्टू दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट्स में से एक है। केरल का खाना, जिसमें ताजे नारियल, चावल, इमली, और मसालों का इस्तेमाल होता है, बहुत प्रसिद्ध है।यहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग एक साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहते हैं, जहाँ मंदिर, चर्च और मस्जिद अक्सर पास-पास देखने को मिलते हैं। इन सभी विशेषताओं के कारण केरल एक बेहतरीन पर्यटन स्थल और रहने के लिए एक आदर्श जगह माना जाता है।
इस तरह ये बात तो जग जाहिर है की केरल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, मनमोहक समुद्र तटों , आकर्षक बैकवाटर , जीवंत सांस्कृतिक उत्सवों और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। पर इसके अलावा एक बात और आपका ध्यान आकर्षित करती है जगह जगह पर टी स्टाल हैं जहां लोग साथ बैठ चाय पीते हैं, मिलते जुलते हैं, समाचार पत्र पड़ते हैं, बातचीत होती है जिससे एक करीबी संपर्क बनता है लोगों के दुख सुख की खबर भी रहती है। साथ ही डोसा, वड़ा, बज्जी( कच्चे केले, मिर्च के पकौड़े, आलू बोंडा) के भी कई स्टाल हैं।और आपको जानकर शायद अचंभा हो ज्यादातर दुकानें व स्टाल औरतें चलाती हैं। साथ ही जिस उम्र में लोग रिटायर हो सुकून की सांस लेते हैं बुजुर्ग भी पीछे नहीं।
ऐसे ही एक शख्स से मुलाकात हुई हमारी जिनका नाम अय्यप्पन कुट्टी जिनकी उम्र 77 की है और सुबह 4 बजे से नियमित रूप से चाय की दुकान चलाते हैं। हाथों में भले कंपन है और चेहरे पर खिली मुस्कान बुलंद हौंसले के साथ,न कोई थकान, न चिड़चिड़ापन बस स्नेह भरा , सादा सरल व्यक्तित्व। उन्हें देख आभास होता है की यदि चाह हो तो उम्र का कोई मलाल नहीं होता बस लग्न और इच्छाशक्ति स्ट्रांग होनी चाहिए। ये एक मिसाल है उन युवाओं के लिए जो आलस, कामचोरी, ऐशोआराम , सुख सुविधा, को ही ज़िन्दगी मानते हैं और मेहनत से कतराते हैं। अय्यप्पन कुट्टी जैसे लोग एक प्रेरणा ही नहीं मिसाल हैं जीवन के मर्म और गहराई को समझने के लिए।

— मीनाक्षी सुकुमारन

मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित| कनाडा से प्रकाशित इ मेल पत्रिका में भी कवितायेँ प्रकाशित | हाल ही में भाषा सहोदरी द्वारा "साँझा काव्य संग्रह" में भी कवितायेँ प्रकाशित |