ख्वाहिशों के बोझ से बचना चाहिए
मन के दरवाज़े पर
अति आकांक्षाएँ खड़ी हैं
शांति की राह रोकती हैं
सपनों की गली में
असंख्य इरादों का सामान
हृदय पर भारी पड़ता है
सोच की उड़ान में
अति लालच का पतवार
नियंत्रण खो देता है
सामान्य जीवन की नदी
लहरों से नहीं,
ख्वाहिशों से उफान लेती है
मनुष्य की दृष्टि
हर वस्तु पाने को लालायित
पर संतोष की किरण ढूँढती है
सपनों की झोपड़ी
अत्यधिक चाहत से ढह जाती है
हृदय की नींव हिलती है
छोटी खुशियाँ
अत्यधिक इच्छाओं के समंदर में
भुला दी जाती हैं
साधारण जीवन की राह
भारी बोझ में भी
धीरे-धीरे अपनाई जाती है
मनुष्य की साधना
हर बार संतुलन खोजती है
ख्वाहिशों को सीमित कर देती है
आत्मा की शांति
इच्छाओं की हद में बंधकर
सच्ची स्वतंत्रता पाती है
जीवन का मूल मंत्र
बहुत कुछ न चाहो
संतोष में आनंद खोजो
— डॉ. अशोक
