पति –पत्नी
रिश्तों की पहचान हो
आत्मीयता, अपनापन हो
नर देव नारी का भी
देवी तुल्य सम्मान हो ।
ना दहेज के झगड़े
ना लड़ाइयां अकारण
पति पत्नी के बीच
प्रणय भाव का गान हो ।
दोनों हैं शक्तियाँ सृष्टि की
विरोधी न दोनों बनें
हाथों में हाथ एक दूजे के
फिर जीवन का उत्थान हो ।
प्यार हो एक दूसरे से
एक –दूसरे के लिए
सम्मान भी इतना अधिक
दोनों एक दूसरे के भगवान हों ।
— आशीष द्विवेदी
