प्रकृति का पर्व है सरहुल
हरे पेड़, नीला आकाश
नदियाँ गाती, गीत पुराने
फूलों की खुशबू बिखरी
पवन का झोंका, ठंडी छाया
पंछियों की चहचहाहट
संगीत बुनती हर ओर
धरती हरी, खेत सुनहरे
किसान हर्ष में नाचे
बालक हँसते, खेलते
तालियों की गूँज
ढोल की थाप, कदमों की ताल
समुदाय संग उत्सव मनाए
सूरज की किरणें चमकी
रंग-बिरंगे वस्त्र लहराए
प्रकृति का पर्व सरहुल
संतुलन, सम्मान, जीवन
मानव और प्रकृति का मेल
सुकून और आनंद की सौगात
— डॉ. अशोक
