माता शेरोंवाली
हे श्रीजगदंबा ! सुख संपत्ति का मुझको वर दे,
जीवन में मेरे तेरा अनंत “आनंद” अमृत मॉं भर दे,
मेरे सारे विकारों को हर जीवन को सरस कर दे,
कंठ में मेरे हो तेरी मधुरता ऐसे मधुरिम शब्द दे ।
भाव मेरे भीतर तू परोपकार, विनम्रता, क्षमा का दे,
ज्ञान का प्रकाश, अंतःकरण की परम पवित्रता दें,
संचित कर्मों का भार हटा भगवती मुझे हल्का कर दे,
एकबार तेरा दर्श दिखा मेरा अधूरा सपना पूरा कर दे ।
मैंने बचपन से तेरा ही सदा दातिए गुणगान सुना,
तू भर्ती है सबकी झोलियाँ दिन दूनी रात चौगुना,
बड़ी दयालु हैं माता शेरोंवाली, अंबे जगपालिका,
अष्टभुजी, शारदा, भवानी, चामुंडा, मॉं कालिका ।
मुस्कुराती हूई एक तेरी छवि अपने मन में बसाई,
मेरी अंखियों बीच मातारानी बस तू ही तू है समाई,
मुझको भी ऐसे बसा लो अपने मन में ओ महामाई,
पावन चरणों में चाहती हूँ जगह इच्छा मन में बसाई ।
धरूँ पल – पल तेरा ध्यान, करूँ तेरा ही देवी गुणगान,
हर लेती है हर कष्ट आनंद” भरी मैया जी तेरी मुस्कान ,
तू ही मेरे ख़ुशियों भरे जीवन की मैया असली पहचान,
वंदन करूँ भवानी, जयकारा जोर से तेरा हो गुंजायमान ।
— मोनिका डागा “आनंद”
