भारतीय साहित्य संगम 345वाँ व्याख्यान व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
मंडला-इस समय सोशल मीडिया के माध्यम से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उत्थान के लिए अनेक कार्य हो रहे हैं।उसी श्रंखला में संस्था भारतीय साहित्य संगम, ऋषिकेश(भारत) ओनलाइन व आफलाइन दोनों प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य सेवा का अभिनव कार्य कर रही है।यह संस्था हर रविवार को शाम 5 बजे एक विद्वान विचारक का किसी विषय विशेष पर ओनलाइन मौलिक व्याख्यान होता है,तत्पश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन होता है,जिसमें देश भर के कलमकार अपनी काव्य प्रस्तुतियाँ देते हैं।
गत रविवार 22.3.2026 मंडला के प्रोफेसर शरद नारायण खरे ने शब्दों के कारवाँ की 345 वीं श्रंखला के अंतर्गत “कलम का मूल्य समसामयिक परिप्रेक्ष्य में” विषय पर व्याख्यान दिया,जिसे सभी के द्वारा सराहा गया।उन्होंने कलम की तीक्ष्णता को हर हालत में बनाये रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कलम चाहे वह कवि, लेखक, कहानीकार, गीतकार, मीडियाकर्मी या पत्रकार की हो सदा सत्य,न्याय, जनहित और देशहित में ही चलनी चाहिए। चाटुकारिता व असत्य के लिए चलने वाली कलम सदा निंदनीय होती है।
फिर दूसरे चरण में उन्होंने नवरात्रि पर केंद्रित काव्यपाठ तरन्नुम में किया,जिसे भी बेहद सराहा गया।
