हनुमान जयन्ती या हनुमान जन्मोत्सव या प्राकट्योत्सव ?
राम भक्त और हनुमान भक्त दोनों के लिये ही हनुमानजी का जन्म दिन बहुत ही खास होता है। इस दिन अनेक जगहों में दिनभर सामूहिक हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड इत्यादि पाठ का आयोजन किया जाता है। हनुमानजी के मन्दिरों को विभिन्न प्रकार के फूलों आदि से खूब सजाया जाता है। अनेक जगहों पर हनुमानजी को छप्पन भोग लगाया जाता है। इसके अलावा रात्रि-जागरण का भी आयोजन किया जाता है। कुल मिलाकर भगवान हनुमानजी के जन्मदिन को देशभर में लोग बड़े ही धूमधाम के साथ मनाते हैं।
आजकल सभी के बीच यह आम चर्चा है कि इस दिन को हनुमान जयन्ती कहा जाय या हनुमान जन्मोत्सव।इसे लेकर लोगों के अपने-अपने मत हैं। इसी के चलते कुछ लोग इसे हनुमान जयन्ती तो कुछ हनुमान जन्मोत्सव कहते हैं।
चूॅंकि जयन्ती और जन्मोत्सव दोनों का सम्बन्ध जन्मदिन से ही होता है इसलिये आम लोगों के मन में उलझन/ भ्रम की स्थिति रहती है। इस कारण से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि –
१] क्या दोनों एक ही है या दोनों में अन्तर है ?
२] फिर यह भी सवाल होता है कि इन दोनों में क्या कहना सही होगा ?
उपरोक्त दोनों प्रश्न पर जब जानकारों से बात की तब जो जानकारी मिली उसके अनुसार जन्म पश्चात वर्ष पूरा होने पर हम उस दिन को वर्षगाँठ, जन्मदिन, जन्मदिवस के अलावा जयन्ती कहते हैं। जैसा आप सभी जानते हैं जीवित के २५ वर्ष पूरा कर लेने पर २५वीं वर्षगाँठ को रजत जयन्ती, ५०वीं को स्वर्ण जयन्ती और ७५ वीं को हीरक जयन्ती कह कर ही मनाते हैं।इसका मतलब यह है कि जीवित के जन्मदिन को जयन्ती कहें तो ग़लत नहीं है।
लेकिन जब जन्मदिन को उत्सव का रुप देते हैं अर्थात उत्सव के रूप में मनाते हैं तो उसे जन्मोत्सव कहते हैं। वहीं साधारणतया देवताओं के जन्मदिन को जब उत्सव के रूप में मनाते हैं तो उसे प्राकट्योत्सव भी कहते हैं।
लेकिन जब हम भगवान हनुमानजी की चर्चा कर रहे हैं तो यह जान लें इन्हें कलयुग संसार का जीवित या जागृत देवता माना जाता है।इसका कारण यह है कि माता सीता ने लंका के अशोक वाटिका में हनुमानजी की भक्ति और साहस से प्रसन्न होकर अजर-अमर (चिरंजीवी) वरदान दिया। इस वरदान के साथ-साथ प्रभु श्री रामचन्द्र जी से भी चिरंजीवी और देवों के देव महादेवजी, इन्द्रदेव सहित अनेक देवताओं ने भी उन्हें अमरता व असीम शक्ति के वरदान दिए थे अर्थात इन सभी देवताओं से अनेकों प्रकार के वरदान प्राप्त होने के बाद भगवान हनुमानजी ने हिमालय के कैलाश क्षेत्र में स्थित गंधमादन पर्वत से कलयुग में धर्म के रक्षक के रूप में निवास कर रहे हैं साथ ही वहीं पर वे प्रभु श्री रामचन्द्रजी की भक्ति व तपस्या भी कर रहे हैं।
जैसा विदित है हनुमानजी के जन्मदिन को हम एक उत्सव के रूप में ही मनाते हैं। अतः मेरा यही मत है कि हमें भगवान हनुमानजी के जन्मदिन को जयन्ती के बजाय जन्मोत्सव या प्राकट्योत्सव कहें तो उचित रहेगा।
— गोवर्द्धन दास बिन्नानी “राजा बाबू”
