कविता

आज के दौर में

आज भरोसा उन पे करो जो दुश्मन है,
जान का खतरा उनसे है जो जीवन है,
दुश्मन तो सदा सावधान ही रखता है,
जहर पिलाएगा वही जो संघ चखता है,
पता नहीं चलता कब वो किसे पैसे खिला दे,
मीठापन वो इतना करे के जहर बना दे,
कुटिलता तो छुप जाती है अब मुस्कानों पे,
न करो भरोसा अपनों पर कब राज बता दे,
अकेले जी लेने का हुनर पैदा कर लो,
दया, मोह और भावों का भी सौदा कर लो,
टांग खींचेंगे जितने ज्यादा अपने रहेंगे,
घर का कुत्ता भौंक भौंक तुझे कुत्ता कहेंगे,
भूल के न भाई पर कभी एतबार भी करना,
खुद से ज्यादा कभी किसी को प्यार न करना,
राज, पाठ और धन के लिए क्या क्या होता है,
आंख मूंद भरोसा करने वाला सब कुछ खोता है,
चढ़के फांसी पर न अपना तुम प्राण निकालो,
हो मरने की जल्दी तो रिश्तेदार बुला लो,
आज के दौर में कहां कोई इंसां मिलता है,
अजगर से ज्यादा फुर्ती से वो लीलता है।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554