मेरी मीठी दुनिया
नन्हा बच्चा, हँसी सुहानी,
मीठी-मीठी उसकी कहानी।
छोटा सा मैं, नन्हा सा मन,
खेल-खेल में बीते दिन।
हाथ में टॉफी, आँखों में नूर,
खुशियाँ जैसे आएँ भरपूर।
पापा संग मैं चलता जाऊँ,
हँसता-गाता मुस्काऊँ।
रंग-बिरंगी प्यारी दुकान,
जैसे हो कोई सुंदर जहान।
दुकान में रंगों की बहार,
देखूँ उसको बार-बार।
छोटे कदम, बड़ा है मन,
खुश रहता हर एक क्षण।
प्यारी लगती हर मुस्कान,
जैसे खिलता हो गुलिस्तान।
प्यार भरा मेरा संसार,
सबसे प्यारा मेरा परिवार।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
