अजनबी होते रिश्ते
रिश्ते भी आजकल अजनबी से हैं होने लगे
लोग नफरतों के बीज अब बहुत हैं बोने लगे
प्यार मोहब्बत की फसलें तो अब तबाह हो गई
खूनी रिश्ते भी अब पहचान हैं खोने लगे
रिश्तेदार ही नारी की आबरू को कर रहे तार तार
मां बहन बेटी की छबि को फैंक चुके दिल से बाहर
न खौफ कानून का न इज़्ज़त का ही है डर
डर रहे हैं आज सभी एक दूसरे पर भरोसा कर
रिशतों में अपनेपन की मिठास अब हो गई है कम
इंतज़ार करती थी जो आंखे रिश्तेदारों के आने का
अपनो के पास आना भी अब बोझ लगने लगा है
समय ही नहीं है एक दूसरे के पास आने जाने का
गया वो जमाना जब आपस में होता था बहुत प्यार
आज एक दूसरे की कर रहे बहुत टांग खिंचाई
एक दूसरे के घर आते जाते थे बहुत रिश्तेदार
संपति के चक्कर में दुश्मन बन बैठे हैं भाई
पुरानों में था बहुत रिश्ते निभाने का चलन
धीरे धीरे रिश्तों का उजड़ रहा अब चमन
अब तो घर में घरवाले ही बेगानों की तरह हैं रहते
पैसों के चक्कर में कोई छोड़ रहा घर कोई छोड़ रहा वतन
मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं आपस में कुछ नहीं हैं कहते
कानून का डर नहीं किसी को बेखौफ हैं घूमते
वो रिश्तों की कद्र क्या जाने जो खुद
चरस गांजा अफीम चिट्टा खाकर नशे में हैं झूमते
— रवींद्र कुमार शर्मा
