झरनों को पुनर्जीवित होने से क्षेत्र के आकर्षण में वृद्धि होगी
देश में पहली बार होगी झरनों की गिनती की खबर सुर्खियों में आई थी ।जल स्त्रोतों की गणना में झरनों की गणना से एक नई दिशा कलकल के स्वर के साथ प्राप्त होगी।जो जल के अभाव में सूखे पड़े हुए थे।उनमे जीवित झरने एवं मृत झरने भी गणना से आकड़े प्राप्त होंगे।जो मृत झरने है उन्हें भी जीवित तभी किया जा सकेगा|पहाड़ी झरनों के ऊपर कही कही जो नदी,नाले के प्रवाह है उसमें रुकावट नही होनी चाहिए|तभी झरने बारिश के मौसम के अलावा अन्य मौसम में भी दर्शनीय होंगे| क्योकि नदियां यदि प्रवाहमान है तो पहाड़ क्षेत्रों में बहने वाले झरनों की वजह से।झरने देखने लायक होते हैं। चाहे वे कम ऊंचाई वाले हों|झरनों में कुछ ऐसा आकर्षण होता है जो ध्यान अपनी ओर खींच लेता है|जब झरने का पानी का सीधे नीचे गिरता हुआ पानी के पीछे की चट्टान की सतह से संपर्क बनाता है जो जीवित होने का प्रतीक होता है।झरना नदी या नाले में कोई भी बिंदु होता है जहाँ पानी एक ऊर्ध्वाधर बूंद या खड़ी बूंदों की एक श्रृंखला के ऊपर से बहता है। ,म प्र शासन नदियों के जल गंगा संवर्धन अभियान के संग झरनों की कायाकल्प कर उन्हें पुनर्जीवित करें तो ये भागीरथी प्रयास से मप्र का आकर्षण एक सौगात के रूप में पर्यटकों को प्राप्त होगा|
— संजय वर्मा “दृष्टि”
