कागज़ की नाव
बरसाती धारा
कागज़ की छोटी नाव
सपने तैरें
नन्हे से हाथ
पानी में छोड़ते
खुशियाँ बहें
मेघों की छाँव
हँसी के संग बहती
नाव सुहानी
गली के मोड़
धारा संग दौड़ती
मन मुस्काए
बचपन के दिन
नदी सा बहते थे
निर्मल सपने
हल्की सी हवा
नाव को सहलाती
राह दिखाए
छोटी सी जीत
किनारे तक पहुँचना
दिल खुशहाल
यादों की लहर
आज भी छू जाती
मन भीग जाए
— डॉ. अशोक
