कविता

पूनम की रात

चुपचाप बैठा
पूनम की रात में
छत पर अकेला
चांद को निहार रहा था मैं…
चारों तरफ शांति ही शांति
श्वेत चादर फैली थी आकाश में
मदमस्त चांद
और ठंडी मलय समीर
घायल कर रही थी
मेरा हृदय !
विचार रूपी नौका
मन रूपी सागर में तैर रही थी
भावुकता के तट से टकराकर
हृदय में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी ।
मैं स्वयं से मुक्त महसूस कर रहा था
एक असीम शांति मिली
जब फिजूल के विचार मिटे
मैं तन्हाई में भी सुकून का एहसास कर रहा था
चुपचाप बैठा…

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111

Leave a Reply