दीए की जिंदगी में हवाओं की ज़िद बर्दाश्त नहीं है
दीया जलता है धीमी साँसों के साथ
हर लौ में एक नाजुक उम्मीद रहती है
हवा की हर टकराहट उसे हिला देती है
फिर भी वह जलना नहीं छोड़ता
अंधेरे से उसकी पुरानी दुश्मनी है
हर झोंका एक परीक्षा बनकर आता है
पर दीया मौन रहकर सहता है
उसकी रोशनी कमजोर नहीं होती
बस थोड़ा काँप जाती है
फिर भी वह उजाला बाँटता रहता है
हवाओं की ज़िद उसकी कहानी नहीं बदलती
क्योंकि रोशनी का स्वभाव ही संघर्ष है
— डॉ. अशोक
