प्यासे पँछी की पुकार
प्यासे पँछी करे पुकार।
दे दो मैय्या कुछ तो प्यार।
भीषण गर्मी की है मार।
हमें दाना देकर करो उपकार।
सकोरे में पानी रखकर करो उद्धार।
आँगन का दाना चुगकर पँछी करें जयजयकार।
पेड़ों में टांग दो सकोरे ,दे दो हमें दाना।
हम पँछी सुनाएंगे तुम्हें मीठे गाना।
रोज सुबह तुम्हारे आँगन चहचहाना।
हम सबका खुशी से झूमना।
तुम्हें भी अच्छा लगेगा ।
जीवन भी सच्चा लगेगा।
पँछी रहेंगे तो पेड़ भी झूमेंगे।
हर खुशियां हर आँगन चूमेंगे।
पँछी धरती के गीत संगीत हैं।
पँछी आसमान के सुंदर चित्र हैं।
पेड़ -पौधे पँछी है धरती का गहना।
इनसे स्वच्छ सुगन्धित है धरा का हर कोना।
इन्हें सहेज कर अपना बना लो।
जीवन को सुखी बना लो।
— डॉ. शैल चन्द्रा
