बच्चों को बनाएँ पर्यावरण का मित्र
आज का युग विज्ञान और विकास का युग है, परंतु इस विकास की दौड़ में प्रकृति का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। वायु, जल और भूमि प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वन-विनाश और जैव-विविधता का ह्रास मानव जीवन के लिए गंभीर संकट बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, अपितु अनिवार्य आवश्यकता है। यदि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखना है, तो बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना होगा। बच्चे ही भविष्य के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें “पर्यावरण का मित्र” बनाना सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान है।
बच्चों को पर्यावरण मित्र बनाने की आवश्यकता
बच्चे भविष्य के नागरिक हैं, इसलिए उनका दृष्टिकोण दीर्घकालीन प्रभाव डालता है। वे परिवार और समाज को प्रभावित कर सकते हैं।
आज हम देख रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है, बेमौसम वर्षा हो रही है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक हो और उसे बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।बच्चों के पालन-पोषण के मामले में हर एक पहलू का ध्यान रखना होता है। ऐसा ही एक विशेष पहलू है, बच्चों को पर्यावरण का मित्र बनाना। इसका सीधा – सा अर्थ है कि उनमें बचपन से ही संस्कार के रंग भरना, जिससे वे बड़े होकर पर्यावरण को बचाने और सही बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें ।
बच्चे सीखने और अपनाने की सबसे तेज क्षमता रखते हैं। बचपन में जो संस्कार दिए जाते हैं, वे जीवनभर उनका साथ रहते हैं। यदि उन्हें प्रारंभ से ही प्रकृति से प्रेम करना सिखाया जाए, तो वे बड़े होकर भी पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देंगे।
पर्यावरण शिक्षा की भूमिका
पर्यावरण शिक्षा बच्चों को केवल जानकारी ही नहीं देती, अपितु उनके भीतर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती है।इसमें विद्यालय, परिवार एवं समाज की महती भूमिका है।
1.विद्यालय की भूमिका
विद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का प्रमुख केंद्र है। यहाँ निम्न उपायों से बच्चों के लिए पर्यावरण शिक्षा को प्रभावी बनाया जा सकता है—
*पाठ्यक्रम में पर्यावरण विषय को रोचक और व्यावहारिक बनाना
*वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण जैसे कार्यक्रम आयोजित करना
*प्रकृति भ्रमण के माध्यम से बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव देना
*विज्ञान परियोजनाओं के माध्यम से पर्यावरणीय समस्याओं पर कार्य कराना
- परिवार की भूमिका
परिवार बच्चों का पहला विद्यालय होता है। यदि माता-पिता स्वयं पर्यावरण के प्रति सजग होंगे, तो बच्चे भी उनका अनुसरण करेंगे।इसके लिए बच्चों को प्रारम्भ से ही प्रेरित किया जाना चाहिए, यथा –
*घर में पानी और बिजली की बचत करना
*प्लास्टिक के उपयोग को कम करना
*पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना
*कचरे का सही प्रबंधन करना
*पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम की भावना बढ़ाना
3.समाज की भूमिका
*सामूहिक स्वच्छता अभियान चलाना
*पार्क और हरित क्षेत्रों का संरक्षण एवं अभिवर्द्धन करना
*पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षारोपण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बच्चों को सम्मानित करना
बच्चों को पर्यावरणीय संस्कार देने आवश्यक
निम्नलिखित कुछ सुझावों के माध्यम से बच्चों में पर्यावरणीय संस्कार विकसित किए जा सकते हैं –
1.प्रकृति से प्रेम
बच्चों को पेड़-पौधों, पक्षियों और जानवरों के प्रति प्रेम करना सिखाना चाहिए। जब वे प्रकृति को अपना मित्र मानेंगे, तो उसे नुकसान पहुँचाने से बचेंगे।
- स्वच्छता का महत्व
“स्वच्छता ही सेवा है” का भाव बच्चों में विकसित करना चाहिए। उन्हें सिखाया जाए कि कचरा, चॉकलेट-टॉफी के रैपर, पन्नी तथा पानी की खाली बोतल इधर-उधर न फेंकें तथा उन्हें निकट के डस्टबिन में ही डालें। अपना कमरा तथा आसपास का वातावरण साफ रखें।
3.जल संरक्षण
बच्चों को पानी का महत्व बताना बहुत आवश्यक है। उन्हें बताएँ कि पानी की एक – एक बूँद बहुत कीमती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि पानी सीमित संसाधन है और इसका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। उन्हें स्नान,ब्रश करते तथा साफ – सफाई करते समय पानी की बर्बादी के प्रति सचेत करें। उन्हें बताएँ कि गिलास में उतना ही पानी लें, जितना पी सकें। गिलास में भरा पानी या पानी की बोतल का पानी फेंककर बर्बाद न करें, उसे किसी गमले में डाल दें। उन्हें वर्षा जल – संचयन के महत्व को भी समझाया जाए।
4.ऊर्जा संरक्षण
ऊर्जा की बचत की सीख बच्चों को बचपन से ही सिखानी चाहिए। उन्हें समझाया जाए कि बिजली एवं गैस का अनावश्यक उपयोग न करें। ईकोफ्रैंडली बनाने के लिए बच्चे जरूरत न होने पर बिजली के उपकरण एसी, पंखा,लाइट आदि को बंद कर दें। दिन में पर्याप्त प्रकाश होने पर बल्ब या ट्यूबलाइट न जलाएँ। इनका प्रयोग आवश्यक होने पर ही करें। कमरे से बाहर निकलते समय पंखा और लाइट बंद कर दें। उपकरणों के सही और सीमित उपयोग से ऊर्जा संरक्षण की आदत डालें।
5.प्लास्टिक से दूरी
प्लास्टिक पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। बच्चों को कपड़े या कागज के बैग का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।बच्चों के खिलौने लें, तो प्लास्टिक के बजाय लकड़ी के खिलौने खरीदें। बच्चों को टिफिन बाक्स एवं गिलास प्लास्टिक के बजाय अच्छी स्टील या काँच के दें।
6.गत्ते का उपयोग करें
गत्ते के बाक्स को फेंकने से अच्छा है कि बच्चे इसका प्रयोग फनी आर्ट प्रोजेक्ट में करें। बाक्स के आकार पर निर्भर करता है कि आप स्पेसशिप, गुड़िया घर या थिएटर के लिए तलवारें, मुकुट आदि बना सकते हैं। कभी खाली बाक्स सामान ले जाने के लिए उपयोग में आ सकता है अथवा उसमें कुछ सामान सुरक्षित रखा जा सकता है।
7.प्रकृति से निकटता
बच्चे जब प्रकृति के निकट होंगे. तब उसकी सुंदरता को अच्छी तरह से अनुभव कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि उन्हें रविवार या अवकाश के दिनों में घूमने के लिए पार्क ले जएँ। इससे वे पेड़ – पौधों से परिचित होंगे तथा प्राकृतिक दृश्यों के साथ रंगबिरंगे फूलों , तितलियों और पक्षियों को देखकर आनंद प्राप्त कर सकते है। लंबी छुट्टियों में बच्चों को प्राकृतिक स्थल की सैर कराएँ तथा वहाँ प्रकृति और पशुओं के बारें में जानकारी दें।
8.वस्तुओं को साझा करना सिखाएँ
अपने छोटे बच्चों को सीख दें कि चीजों को साझा करना कितनी अच्छी आदत है। उन्हें पुराने कपड़े और किताबें दूसरे बच्चों को खुशी-खुशी दे देनी चाहिए। वे चाहे तो पुरानी या बेकार पड़ी चीजें जैसे खिलौने, पुरानी सायकिल या रैकेट अपने छोटे भाई – बहिनों को अथवा अन्य किसी बच्चे को दे दें।
- बच्चों को बागवानी से जोड़ें
बीज बोना और उसको बढ़ा होते देखने से अधिक रोचक और ज्ञानवर्द्धक भला क्या हो सकता है। बच्चों के लिए यह गतिविधि बहुत रोमांचक होती है। इसके लिए आवश्यक है कि बच्चों में बागवानी की रुचि पैदा करें। वे फूलों और जड़ी-बूटियों के पौधे घर के बगीचे में आसानी से उगा सकते हैं। इससे वे पौधों को खाद – पानी देना और देखभाल करना भी सीख जाएँगे।
10.पशु – पक्षियों से प्रेम
बच्चों को सीख देनी चाहिए कि हमारे आसपास रहने वाले पशु – पक्षी भी प्रकृति के महत्वपूर्ण अंग हैं। हमें उनके प्रति प्रेम और दयाभाव रखना चाहिए। उन्हें परेशान करके कभी न सताएँ। निराश्रित घूम रही गायों को रोटी खिलाएँ, घर के बाहर पीने के लिए पानी रखें तथा चिड़ियों के लिए आँगन या छत पर दाना – पानी रखें।
11.वृक्षारोपण की आदत
पेड़ हमारे जीवन के रक्षक हैं। बच्चों को घर – आँगन, विद्यालय और गाँव – गली में खाली स्थानों पर पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।उन्हें हरियाली , पर्यावरण जागरूकता और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के अभियानों से जोड़ा जाए। इसके लिए विद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिए। ‘हर स्कूल हरियाली ‘अभियान के माध्यम से बच्चों को सतत भविष्य निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
व्यावहारिक गतिविधियाँ
बच्चों को केवल उपदेश देना पर्याप्त नहीं है, अपितु उन्हें व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल करना अधिक प्रभावी होता है।ये गतिविधियाँ निम्न प्रकार हो सकती हैं –
*स्कूल में पर्यावरण क्लब बनाकर बच्चों को सक्रिय भूमिका देना
- प्रत्येक बच्चे को एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी देना
*रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट द्वारा पुराने कागज, प्लास्टिक आदि का पुनः उपयोग करना सिखाना
- जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रशिक्षण देना
- विश्व पर्यावरण दिवस, पृथ्वी दिवस, विश्व जल दिवस, ऊर्जा संरक्षण दिवस, जैवविविधता संरक्षण जैसे अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित करना
पर्यावरण संरक्षण में तकनीक का उपयोग
आज के बच्चे तकनीक से जुड़े हुए हैं। इस तकनीक का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए भी किया जा सकता है।पर्यावरण से संबंधित वीडियो और ऐप्स डिजिटल माध्यम से कागज की बचत की जा सकती है।
पर्यावरण – मित्र बनाने हेतु सुझाव
बच्चों को पर्यावरण- मित्र बनाने में कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे – आधुनिक जीवनशैली में प्रकृति से दूरी, तकनीक का अत्यधिक उपयोग,जागरूकता की कमी, सामाजिक उदासीनता आदि। इन चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
- बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए।
*पर्यावरण संरक्षण हेतु बड़ों के द्वारा बच्चों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत किए जाने चाहिए, जिससे वे प्रेरित एवं प्रोत्साहित हो सकें।
*पर्यावरण शिक्षा को रोचक और व्यावहारिक बनाया जाए, बच्चों को प्रकृति के साथ समय बिताने का अवसर दिया जाए।
*परिवार, विद्यालय और समाज मिलकर प्रयास करें, सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किए जाएँ तथा बच्चों को प्रोत्साहन और पुरस्कार दिए जाएँ।
पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसमें बच्चों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि हम उन्हें बचपन से ही पर्यावरण का मित्र बनाना सिखा दें, तो वे न केवल स्वयं जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, अपितु समाज को भी जागरूक करेंगे।
बच्चों में डाले गए छोटे-छोटे संस्कार—जैसे पानी बचाना, पेड़ लगाना, स्वच्छता बनाए रखना—भविष्य में बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं। यह केवल एक शिक्षा नहीं, अपितु एक जीवनशैली है जिसे अपनाकर हम पृथ्वी को सुरक्षित और सुंदर बना सकते हैं।
अतः हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार बनाएँगे, ताकि वे इस धरती के सच्चे “मित्र” बन सकें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरा-भरा और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित कर सकें।
— गौरीशंकर वैश्य विनम्र
