मुक्तक/दोहा

मुक्तक

चालाक लोमड़ी धूर्त भेडिये, जब जंगल में सरकार बनायेंगे,
हिरणी से बलात्कार आरोप, ख़रगोशों पर लगाये जायेंगे।
बचे शिकार पर पलने वाले, गीदड़ सरकारी वकील बनेंगे,
अभयदान शर्तों पर लकड़बग्घे, न्यायाधीश बनकर आयेंगे।

शाकाहारी पशुओं को, जीने का अधिकार नहीं मिलेगा,
पशु अधिकारों के सभी कानून, अब निरस्त किये जायेंगे।
शेर और बकरी एक घाट, धार्मिक बातों पर प्रतिबंध लगेगा,
जंगल में हत्या के सभी आरोप, जंगली भैंसे पर ही आयेंगे।

जातिवाद का ट्रम्प कार्ड भी, नयी सरकार की नीति बनेगा,
शेर चीते बाहुबली जानवर, मूल निवासी विरोधी कहलाएँगे।
नयी सरकार के अन्तर्गत, नये कानून से जंगल राज चलेगा,
गधे सभी मन्त्री पद पर बैठेंगे, घोड़े सुरक्षा में तैनात रहेंगे।

सदियों से शोषित गधे को, अब गधा नहीं कहा जायेगा,
संविधान में संशोधन कर वह, बोझा वाहक कहलायेंगे।
जश्न मनेगा जंगल में जब, ताड़ी पीकर गीदड़ का भाषण,
सरकार विरोधी सारे दल, आतंक में लिप्त बताये जायेंगे।

गिरगिट बन कर पत्रकार, घूम रहे हैं नदी घाट जंगल में,
कुछ विरोधी खेमें में संलिप्त, मंत्रालय में दिख जायेंगे।
कुछ शीश महल बनवाने को आतुर, निज हित ढूँढ रहे,
कुछ ताड़ी के पक्ष खडे, मुफ्त वितरण के लाभ गिनायेंगे।

आरक्षण के प्रावधान भी, जंगल में निर्धारित होंगे,
घोड़ों की दौड़ गधे शामिल, नियम बनाये जायेंगे।
प्रथम पुरस्कार आरक्षित, बाकी पर देखा जायेगा,
डाउट या टाई अप होने पर, गधे ही सम्मान पायेंगे।

— अ. कीर्तिवर्द्धन

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