धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

साँच को कभी भी आँच नहीं

हम सभी को हमेशा सत्य ही बोलना चाहिये क्योंकि सत्य वचन का वजन स्वतः ही बढ़ जाता है। आपको अपने वचन को सिद्ध करने के लिये किसी भी प्रकार की कसम खाने की आवश्यकता ही नहीं।और याद रखें सत्य बोलने वाले की कभी भी हार नहीं होती।हाँ,कुछ समय के लिये परेशानी हो सकती है।लेकिन लाख मुसीबत आने पर भी सच्चा आदमी घबडाता नहीं है बल्कि ड़टा रहता है और अन्त में उन मुसीबतों से छूटकारा मिलना तय है क्योंकि साँच को कभी भी आँच नहीं।

अब उपरोक्त से सम्बन्धित एक ऐतिहासिक घटना आप सभी के ध्याननार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ-

गत बार बीते २२ मई को हम सभी ने भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आन्दोलन के प्रणेता राजा राममोहन राय का २५०वाँ जन्मदिन मनाया था।उन्हीं के जीवन से सम्बन्धित यह सच्ची घटना अनेक मायनों में प्रेरणादायक है जो उनको राजा की उपाधि मिलने के पहले घटित हुयी थी।

हुआ यों कि १८०८ व १८०९ के बीच राममोहन रॉयजी की जब भागलपुर में तैनाती थी तब वे एक बार पालकी में सवार होकर गंगाघाट से भागलपुर शहर की ओर जा रहे थे, तो घोड़े पर सैर के लिए निकले कलेक्टर सामने आ गये । पालकी में लगे परदे के कारण राममोहन रायजी उनको देख नहीं सके और यथोचित शिष्टाचार से चूक गये । आप सभी के लिये यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि उन दिनों किसी भी भारतीय को किसी अंग्रेज अधिकारी के आगे घोड़े या वाहन पर सवार होकर गुजरने की इजाजत नहीं थी। इस ‘गुस्ताखी’ पर कलेक्टर आग बबूला हो उठे।राममोहन रायजी ने उन्हें सच्ची बात बता दी अर्थात अपनी तरफ से उन्हें यथासंभव सफाई दी लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए तब वे उस समय वहाँ से वापस अपनी पालकी में बैठ निकल लिये। लेकिन उसके बाद १२ अप्रैल ,१८०९ को उन्होनें गवर्नर जनरल लार्ड मिंटो को उस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से लिख भेजा जिसके परिणाम स्वरूप गवर्नर जनरल ने उस कलेक्टर से उस घटना का पूरा विवरण मंगाया।जैसा हम सभी जानते हैं कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट में राममोहनजी की शिकायत को झूठी बताया । लेकिन जैसा मैंने ऊपर व्यक्त किया सत्य वचन का वजन स्वतः ही बढ़ जाता है इसलिये गवर्नर जनरल ने स्वतः अलग से जांच कराई और राममोहन जी की बात सही पायी तब फिर अपने न्यायिक सचिव की मार्फत कलेक्टर को फटकार लगाकर आगाह कर दिया कि वे भविष्य में देशी लोगों से बेवजह के वाद-विवाद में न फंसें। इस तरह राममोहन जी सत्य वचन के चलते मुसीबत से बचे ही नहीं बल्कि अन्य भारतीयों के लिये भी रक्षा कवच निर्माण कर पाये।

अन्त में निष्कर्ष में मैं सुप्रसिद्ध कवि शिरोमणि कबीर दास जी ने सत्य की शक्ति का वर्णन करते हुये जो निम्न दोहा गढ़ा वह यहाँ भावार्थ सहित आप सभी के लिये प्रस्तुत कर रहा हूँ –
साँच शाप न लागे, साँच काल न खाय।
साँचहि साँचा जो चले, ताको कहत न शाय।।
उपरोक्त दोहे से कबीर दासजी हम सभी को बता दिया कि सत्य अथाह शक्ति है, यही यथार्थ है। सच बोलने वाले को तीनों लोकों का भी भय नहीं होता, क्योंकि सत्यवादी से तो स्वयं यमराज भी डरते हैं।सत्य को दबा पाने की अथवा छुपा पाने की क्षमता संसार में किसी भी वस्तु में नहीं है। और कहा है कि सांच, अर्थात सत्य बोलने वाले को कोई श्राप नहीं लगता, किसी की बद्दुआ का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही सत्य को न ही काल खा सकता है, न ही यह कभी मरता है अर्थात सत्य अमर एवं अजेय है। जो भी सत्य के सांचे में ढल जाता है , अर्थात जो मन-कर्म एवं वचन से सत्य का साथ देता है , उसका भला कौन नाश कर सकता है ?

— गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू”

गोवर्धन दास बिन्नानी 'राजा बाबू'

जय नारायण ब्यास कॉलोनी बीकानेर / मुम्बई 7976870397 / 9829129011 [W]

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