नन्हा भक्त
छोटे-छोटे हाथ जोड़े, मन में सच्ची आस,
नन्हा बच्चा खड़ा है जैसे, भगवान के बिलकुल पास।
आँखें उसकी बंद हुई हैं, होठों पर है नाम,
बिना कहे सब कह देता है, उसका भोला काम।
ना कोई दिखावा उसमें, ना कोई अभिमान,
साफ दिल से जो मांगे वो, सुन लेता भगवान।
छोटी-सी उस पूजा में भी, बड़ी है एक बात,
सच्चे मन की हर प्रार्थना, कर देती है चमत्कार।
ना मंदिर की भीड़ जरूरी, ना ऊँचे दरबार,
जहाँ प्रेम से सिर झुक जाए, वहीं बसते भगवान।
माँ की सीख, पिता का साया, संस्कारों की थात,
नन्हे दिल में बस रही है, पूरी जग की बात।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
