सामाजिक

मातृ-ऋण और स्मृतियों का अनमोल आँचल

बचपन का वह सुनहरी दौर मानव जीवन के इतिहास का सबसे भावुक और निस्वार्थ अध्याय होता है, जिसकी प्रत्येक पंक्ति और शब्द केवल और केवल ‘मां’ के असीम और निस्वार्थ प्रेम की स्याही से लिखे गए होते हैं। जब हम जीवन के इस पड़ाव पर खड़े होकर अतीत के झरोखों से पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वह बीता हुआ समय हमें केवल कैलेंडर की सूखी तारीखें या पुरानी यादें नहीं लगता, बल्कि स्नेह, ममता और सुरक्षा से सराबोर वे अनमोल क्षण नज़र आते हैं जिन्हें हमने अपनी स्मृतियों की मख़मली पोटली में आज भी बड़ी शिद्दत और जतन के साथ सहेज कर रखा हुआ है। हमारी बचपन की सबसे ख़ुशहाल और जीवंत स्मृतियों में यदि कोई स्थान सर्वोच्च शिखर पर है, तो वह निस्संदेह ‘मां की गोद’ है जो किसी भी बालक बालिका के लिए इस पूरी क़ायनात का सबसे सुरक्षित, सबसे कोमल और सबसे शांतिपूर्ण कोना होती है। वह गोद केवल विश्राम करने की एक भौतिक जगह मात्र नहीं थी, बल्कि एक ऐसा जादुई और रूहानी आशियाना था जहाँ पहुँचते ही दुनिया की हर फ़िक्र, भविष्य का हर डर, बाहर की हर कड़वाहट और चोट का गहरा से गहरा दर्द भी जैसे पल भर में काफ़ूर हो जाता था। वह स्नेह से लबालब भरा हुआ हर एक पल, मां की वह मधुर लोरी जिसे सुनकर नींद ख़ुद-ब-ख़ुद पलकों पर उतर आती थी और उनकी ममतामयी उंगलियों का हमारे उलझे हुए बालों में फिरना,यह सब कुछ इतना दिव्य और अमूल्य था कि आज के इस भागदौड़ भरे, यांत्रिक और शोरगुल से युक्त आधुनिक जीवन में उस सुकून की कमी हमारे भीतर तक साफ़ खलती है। मां का प्यार इस दुनिया में एकमात्र ऐसा तत्व है जो किसी भी प्रकार के स्वार्थ या शर्त का मोहताज नहीं होता क्योंकि एक मां ही होती है जो हमारी एक छोटी-सी मासूम मुस्कान की ख़ातिर अपनी रातों की पूरी नींद सहर्ष कुर्बान कर देती है और हमारी पसंद का निवाला तैयार करने के लिए तपती रसोई में घंटों पसीना बहाती है। हमारी हर नादानी, हर गलती और हर ज़िद को अपने आँचल में समेटकर उसे मुस्कुराहट के साथ ,मुआफ़ कर देना उनके भीतर छिपे उस असीम धैर्य और करुणा का जीता-जागता प्रमाण है जिसने हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी। वह हमारे लिए केवल एक अभिभावक की भूमिका में नहीं रहीं, बल्कि वे हमारी पहली मार्गदर्शक, पहली शिक्षक और जीवन की सबसे सच्ची व निडर मित्र भी थीं जिन्होंने बिना बोले ही हमें संस्कार और नैतिकता का पाठ पढ़ा दिया। जैसे-जैसे वक्त का क्रूर और निरंतर चलता पहिया अपनी गति बढ़ाता है, हम बड़े हो जाते हैं और दुनियादारी की उलझनों में फंस जाते हैं। आज शायद हमारे पास भौतिक सुख-सुविधाओं के तमाम आधुनिक साधन और ऐश्वर्य मौजूद हों, लेकिन वह बचपन की बेफ़िक्री, मां के पल्लू को पकड़कर पीछे-पीछे घूमना और उनके हाथों के स्पर्श में छिपा वह अद्भुत जादू अब केवल यादों की धुंधली गलियों में सिमट कर रह गया है। कभी-कभी एकांत में मन व्याकुल होकर यह चाहता है कि काश! समय की यह रफ़्तार यहीं ठहर जाती, प्रकृति पीछे की ओर मुड़ती और हम फ़िर से उसी बचपन की शीतल छाँव और मां के आँचल के साये में हमेशा के लिए लौट पाते। यह एक शाश्वत सत्य है कि हम अपनी पूरी उम्र, अपनी सारी सफलताएँ और अपनी पूरी संपत्ति भी लगा दें, तब भी मां के उन अहसानों और उनके द्वारा किए गए त्याग का सूक्ष्म अंश मात्र भी कर्ज कभी नहीं उतार सकते। हम उनके उस निस्वार्थ स्नेह, उनकी आधी रात को उठी दुआओं और उनके द्वारा रोपे गए पवित्र संस्कारों के सदैव ऋणी रहेंगे क्योंकि मां का अस्तित्व इस धरती पर ईश्वर के साक्षात स्वरूप का अनुभव करने जैसा पवित्र एहसास है। अब जबकि समय बीत चुका है, ये यादें ही हमारा वह संबल और सहारा हैं जो हमें उस ख़ुशनुमा और पावन अतीत से एक अदृश्य डोर के माध्यम से जोड़ कर रखती हैं। मां के प्रति सच्ची कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का सबसे बड़ा और एकमात्र तरीक़ा यही है कि हम उनके दिए हुए उच्च संस्कारों को अपने आचरण में जीवित रखें और उस ‘अमर ममता’ का हृदय से सम्मान करें जिसने हमें शून्य से गढ़कर आज इस योग्य बनाया है कि हम समाज में गौरव के साथ खड़े हो सकें।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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