कविता

मां

मां कभी मुस्कुराना नहीं भूलती थी,
तकलीफ़ में थी पर हमें
खुशियां बाटना नहीं भूलती थी।

अब वो नहीं है दुनिया में मगर,
अब भी हम तकलीफ में हो तो,
सपनों में दिलासा दिलाना नहीं भूलती।

जाने कैसा रिश्ता है मां का,
जोड़ती है घर को सदा,
याद रखती है सबको सदा,
खुद को याद करना बस भूलती ।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

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