कविता

कल किसने देखा है

क्या कल कभी आता है,
सब काम लोग कल पर टाल जाते हैं,
क्या होता है कल आखिर,
न किसी ने देखा, न कोई जान पाता है।
जीवन तो बस आज में है,
कल का सपना अधूरा रह जाता है,
जो जीते हैं हर पल को खुलकर,
सफल वही कहलाता है।
क्या पता कल जिंदगी रहे न रहे,
फिर क्यों अरमान अधूरे रखें,
जो करना है, आज ही कर लो,
क्यों वक्त को यूँ बहने दें।
कहीं ऐसा न हो एक दिन,
मन में बस पछतावा रह जाए,
काश वो काम आज कर लिया होता,
ये सोच दिल को सताए।
क्योंकि कल कभी नहीं आता,
सच तो केवल आज ही है,
हर तमन्ना पूरी कर लो,
क्या पता कल हो न हो।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384

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