ग़ज़ल
आप तो क्या कमाल लिखते हो
जिंदगी के सवाल लिखते हो
कहते हो कुछ नहीं लिखा हमने
फिर भी तो पूरा हाल लिखते हो
है गजब बेबसी का आलम ये
कैसे-कैसे ख्याल लिखते हो
बह रहा लावा था खामोशी से
कैसे आया उबाल लिखते हो
लेखनी का कमाल है प्यारे
राख को भी गुलाल लिखते हो
आप हीरे हो तो जौहरी हम हैं
हम भी हैं बेमिसाल लिखते हो
जुगनू को कहते हो सितारे हो
चांद को है मलाल लिखते हो
चोट खाते हो मुस्कुराते हो
कैसे हो कर निहाल लिखते हो
सुखनबर आप तो कमाल के हो
चांद तारों के हाल लिखते हो
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव
