लोरी
आज मैंने पहली बार एक लोरी लिखी है- अपने पोते मास्टर आर्यव के लिए। आप भी आनन्द लीजिए।
सो जा मेरा प्यारा
सबका राज दुलारा
निंदिया रानी आएगी
मीठे सपने लाएगी
आसमान में तारे हैं
लगते कितने प्यारे हैं
चन्दा मामा चमक रहा
देखो कैसा दमक रहा
ठंडी ठंडी हवा बही
ख़ुशबू कैसी फैल रही
सुन्दर परियाँ आयेंगी
खूब खिलौने लायेंगी
सपनों में खो जाता है
मेरा बेबी सो जाता है
— डॉ. विजय कुमार सिंघल
ज्येष्ठ प्रथम शु. २, सं. २०८३ वि. (१८ मई, २०२६)
