कविता

उसे राजा बनाना होगा

गधे को गधा मत बोलो,
वह भी प्यार का हकदार है,
उसकी भी अपनी दुनिया,
उसकी अपनी सरकार है।

इज्जत अगर न दोगे तुम,
इज्जत कहाँ से पाओगे,
दिन-रात खटते रहोगे,
और “गधा” कहलाओगे।

गुस्से से भर जाओ तो,
गुस्सा बाहर निकालो जी,
मन फिर भी शांत न हो तो,
गधों की परेड करा लो जी।

राजनीति में आने का,
सब गधों को अधिकार है,
क्या जंगल, क्या ये समाज,
सबको यह स्वीकार है।

बंदर-भालू को मदारी,
इशारों पर नचवाता है,
लेकिन स्वाभिमानी गधे को,
वह कभी नहीं झुकाता है।

जंगल-भक्ति दिखलाने को,
सब पशुओं को आना होगा,
अगर चढ़ जाए भक्ति सिर पर,
गधे को राजा बनाना होगा।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554

Leave a Reply