कविता
जिंदगी की सारी मौज खत्म हुई
अब जिंदगी शुरू हुई
रास्ते का न कोई हमसफर, न कोई मंजिल
एक राही की तरह अब यूंही चलते जाना
खुशी के किस्से खत्म हुए
पुराने रिश्ते सारे छूट गए
गुमनाम सी है अब जिंदगी
हर चेहरा सिर्फ मतलब से देखता
न कोई साथ न कोई बात
बस साथ हैं अपने ही जज्बात…
— गंगा मांझी, ग्वालियर
