मेरे अपने
मेरे अपने,
सजाये थे जिन्होंने,
सतरंगे सपने,
माटी को संस्कारों की छिन्नी से,
गढ़ा था बड़े अरमानों से,
स्नेह से,संयम से,
याद बहुत आते हो,
‘आई बाप्पा’
याद बहुत आता हैं,
आपका प्यार-दुलार,
आँचल की छाँव,
नेहभरी ठाँव,
परम प्रभु-सा छत्र,
चट्टान-सा संबल,
मीठी-मीठी डांट,
हिदायतें, टोंकाटोंकी,
पाकर आपसे शिल्पकार,
आपसे स्नेहिल मातु पिता,
धन्य सौभाग्य हमारा,
दमके जगमग जीवन तारा।।
