कविता

आसान नहीं होता

आसान नहीं होता
छुट्टियों के बाद
बच्चों को वापस विदा करना ।
साथ ले जाते हैं वे
सारी खिल-खिलाहट,
मुस्कुराहट और खुशबू ।
ले जाते हैं वो
घर की सारी रौनक…
सूना कर जाते हैं घर का आंगन।
आसान नहीं होता
जाते- जाते ये कहना है…
सब रख लिया है न???
मोबाइल, चार्जर, पैसे, दवाईयाँ ,
ठीक से रख लिया है न ?
कुछ छूटा तो नहीं ?
जानते हैं हम भी
और बच्चे भी
कितना कुछ छूट रहा है…
आसान नहीं होता
जाते -जाते कहना…..
ध्यान रखना अपना मैसेज, कॉल करते रहना ।
आसान नहीं होता….
स्टेशन पर सी ऑफ करने जाते वक्त
खुद को मजबूती से संभाले रखना।
अपने आँसुओं को मजबूती से रोक लेना,
जिससे कि वे अपने कर्म- पथ पर
मजबूती से आगे बढ़ सकें।
सच में
आसान नहीं होता
छुट्टियों के बाद
बच्चों को विदा करना ।

— शालिनी श्रीवास्तव “सनशाइन”

शालिनी श्रीवास्तव "सनशाइन"

शिक्षिका एवं लेखिका गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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