दिव्या अनुराग
जन्म जमांतर की मेरी
अतृप्त इच्छाएं
मुझे छूने लगी है।
देख कर तुमको
मुझ में प्रेम जिज्ञासा
फिर उत्पन्न होने लगी है।
तुम्हारे अस्पर्श अहसास
मेरे सहस्रार को
जागृत करने लगे है।
न चाहते हुए भी
मेरे अनाहत में
तुम्हारे स्वर को गूंजने लगे हैं
— डॉ. राजीव डोगरा
